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मध्य प्रदेश

नकारात्मकता V/S सकारात्मकता की लड़ाई में घबराई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में कांग्रेस को जवाब देने की बनी रणनीति

मध्य प्रदेश भाजपा की ओरछा में हुई दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस और उसके मुद्दे हावी रहे। भाजपा की तरफ से कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्...

Sep 2, 2026 2 min read
नकारात्मकता V/S सकारात्मकता की लड़ाई में घबराई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में कांग्रेस को जवाब देने की बनी रणनीति

📷 Cover Photo: नकारात्मकता V/S सकारात्मकता की लड़ाई में घबराई भाजपा प्रदेश

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मध्य प्रदेश भाजपा की ओरछा में हुई दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस और उसके मुद्दे हावी रहे। भाजपा की तरफ से कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया और कहा गया कि कांग्रेस प्रदेश भर में नकारात्मकता का माहौल पैदा कर रही है। भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए बयान यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि भाजपा इस वक्त बैकफुट में है। खासकर जिस प्रकार से दतिया उप चुनाव में भाजपा को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा उससे भाजपा के रणनीतियों की पोल खुल गई है। यही कारण है कि भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में कांग्रेस से निपटने के लिए लगातार प्रयास किए गए और नेताओं से सुझाव भी मांगे गए । अब सवाल इस बात का उठता है कि कांग्रेस विपक्ष में है तो सरकार के प्रति नकारात्मकता का माहौल बनाना उसका काम है। सरकार के कामों में कभी निकालना भी कांग्रेस का काम है। ऐसी स्थिति में भाजपा आरोप लगा रही है कि कांग्रेस प्रदेश भर में नकारात्मकता का माहौल बना रही है। आखिर विपक्ष में रह कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ नकारात्मकता का माहौल नहीं बनाएगी तो चुनाव में खुद के मजबूत होने का दावा कैसे करेगी। जबकि भाजपा पूर्व की कांग्रेस सरकारों के खिलाफ खुद नकारात्मकता का माहौल बनाती है और उसका लाभ आज भी उठाती है। मतलब साफ है कि कांग्रेस के आगे भाजपा कमजोर पड़ती नजर आ रही है। जिस भाजपा में पूरी एकजुटता के साथ विपक्ष का सामना किया जाता था वहीं भाजपा विपक्ष से निपटने के लिए प्रदेश कार्यसमिति में नेताओं से सुझाव मांगती नजर आई जो यह दर्शाता है कि इस वक्त कांग्रेस के बनाए चक्रव्यूह में भाजपा बुरी तरह फंसी नजर आ रही है जिससे निकलने के लिए भाजपा को अपने योद्धाओं को मैदान में उतारने के लिए अनुरोध करना पड़ रहा है। दरअसल भाजपा अपनी कमजोरियों को टटोलने के बजाय कांग्रेस के नकारात्मकता को ज्यादा तवज्जो दे रही है। भाजपा अगर अपनी कमियों पर सुधार कर लें तो कांग्रेस के मुद्दे खुद नाकाम हो जाएंगे लेकिन सवाल यही उठता है कि बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन?

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