मध्य प्रदेश
'कन्फ्यूज' भाजपा के कार्यकर्ता किसके पास जाएं किसको सुनाएं अपनी समस्या कार्यालय में नहीं होता कोई पदाधिकारी
मध्य प्रदेश भाजपा में बाहरी तौर पर तो सबकुछ ठीक दिख रहा है लेकिन उस हकीकत का जमीन से कोई सरोकार नहीं है। दरअसल पार्टी के छोटे कार्यकर्ताओं में असंतोष ...
• Nov 6, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: 'कन्फ्यूज' भाजपा के कार्यकर्ता किसके पास जाएं किसको सुनाएं अ
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मध्य प्रदेश भाजपा में बाहरी तौर पर तो सबकुछ ठीक दिख रहा है लेकिन उस हकीकत का जमीन से कोई सरोकार नहीं है। दरअसल पार्टी के छोटे कार्यकर्ताओं में असंतोष का दौर बढ़ता जा रहा है। जिस प्रकार से अलग-अलग जिलों में पार्टी का कांग्रेसी करण हो रहा है उससे भाजपा के मूल कार्यकर्ता खुद को असहाय सा महसूस कर रहे हैं। कई जिलों में स्थितियां ऐसी निर्मित हो रहीं हैं जिससे नाराज होकर पार्टी के मूल कार्यकर्ता घर बैठ गए हैं और कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता सत्ता की चासनी चाटने में मस्त हैं। दरअसल वर्तमान अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से पहले वीडी शर्मा ने अपने कार्यकाल में ऐसी व्यवस्था बनाई थी कि राजधानी के बाहर से आने वाले कार्यकर्ताओं की सुनवाई के लिए प्रदेश कार्यालय में भगवानदास सबनानी जैसे मंझे हुए पदाधिकारी को बैठाया जाता था। जो कार्यकर्ताओं की बात सुनते थे और क्षमता के अनुसार उसका हल भी निकालते थे। प्रदेश संगठन महामंत्री के तौर पर हितानंद शर्मा ज्यादातर प्रदेश कार्यालय में मौजूद रहते थे और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं को खत्म कर देते थे। लेकिन संगठन में बदलाव के साथ ही नए पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई तो सब अपनी डफ़ली-अपना राग अलापने में व्यस्त हैं। संगठन महामंत्री के तौर पर चन्द्रशेखर तिवारी की नियुक्ति को डेढ़ महीने से ऊपर हो चुके हैं जो अब तक सिर्फ पहचान बनाने में ही व्यस्त हैं। दूसरी तरफ प्रदेश कार्यालय में एक भी ऐसा पदाधिकारी नियमित रुप से नहीं बैठाया जा रहा जो कार्यकर्ताओं की बात सुन सके। कार्यालय में प्रदेश भर से कार्यकर्ता आते हैं तो वो इस कन्फ्यूजन में रहते हैं कि वो किससे मिलें और किससे अपने दिल की बात करें। कार्यकर्ता एक से दूसरा कार्यालय झांकते रहते हैं। सभी कार्यालयों में दरवाजे लगे हैं बिजली बंद है और कार्यकर्ताओं के दिल में भी अंधेरा गूंज रहा है। ऐसी स्थिति में कार्यकर्ता किसके पास जाएं।ऐसा भी नहीं कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं मिलते। हेमंत खंडेलवाल प्रदेश कार्यालय में रहते हैं तो लगातार कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मिलते हैं लेकिन उनकी टीम में कुछ ऐसे लोग भी नियुक्त हुए हैं जो अपने हिसाब से ही कार्यकर्ताओं की मुलाकात करवाते हैं। प्रदेश कार्यालय से लेकर उनके निवास तक यही हालात हैं। निवास पर भी मीडिया टीम के कुछ लोग मौजूद रहते हैं। वो खुद की चलाते हैं जिनकी मर्जी उसी को मिलवाएंगे अन्यथा कोई बहाना करके कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। ऐसी स्थिति में कार्यकर्ता कन्फ्यूजन की स्थिति में हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि कार्यकर्ता इसी प्रकार कन्फ्यूज रहा तो आने वाले समय में पार्टी की क्या स्थिति होगी क्योंकि कन्फ्यूज कार्यकर्ता काम भी नहीं कर पाएगा।
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