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मध्य प्रदेश

कांग्रेस ने चिन्हित कीं 70 कमजोर सीटें तो BJP ने भी 35 सीटों के लिए बनाया मास्टर प्लान लड़ाई अब आर-पार की होगी

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 के लिए अभी दो साल बाकी हैं, लेकिन दोनों बड़ी पार्टियों ने होमवर्क शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने 70 ऐसी सीटें चिन्हित...

Sep 8, 2026 2 min read
कांग्रेस ने चिन्हित कीं 70 कमजोर सीटें तो BJP ने भी 35 सीटों के लिए बनाया मास्टर प्लान लड़ाई अब आर-पार की होगी

📷 Cover Photo: कांग्रेस ने चिन्हित कीं 70 कमजोर सीटें तो BJP ने भी 35 सीटों

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 के लिए अभी दो साल बाकी हैं, लेकिन दोनों बड़ी पार्टियों ने होमवर्क शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने 70 ऐसी सीटें चिन्हित की हैं, जहां वह कभी नहीं जीती या एक-दो बार ही जीत पाई है। वहीं बीजेपी ने भी 35 ऐसी सीटों को चैलेंजिंग माना है, जहां जनसंघ के समय से कमल नहीं खिला।

कांग्रेस का प्लान - घर-घर वोटर वेरिफिकेशन

कांग्रेस सबसे पहले इन 70 सीटों पर घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेगी। इंदौर में 19 सितंबर को राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे के बाद इस पर फोकस और तेज होगा। वोटर्स के नाम, फोन नंबर और पूरी जानकारी जुटाई जाएगी ताकि सीधा संपर्क किया जा सके। यह अभियान करीब 6 महीने चलेगा।


गौरतलब है कि 2023 के चुनाव में 230 में से कांग्रेस को सिर्फ 66 सीटें मिली थीं।

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती वाली सीटें कौन सी?
- गोविंदपुरा (भोपाल): 1980 से बीजेपी का कब्जा। पहले बाबूलाल गौर, अब उनकी बहू कृष्णा गौर विधायक।
- रहली (सागर): 1985 से गोपाल भार्गव लगातार जीत रहे हैं।
- इंदौर-2: 1993 से बीजेपी के पास।
- सीहोर: 1985 के बाद कांग्रेस कभी नहीं जीती।
- त्योंथर: आखिरी बार 1990 में कांग्रेस जीती थी।

बीजेपी का काउंटर प्लान - 51% वोट शेयर का लक्ष्य

बीजेपी ने भी 35 कमजोर सीटों के लिए माइक्रो-प्लानिंग की है। चार-चार गांवों का क्लस्टर बनाकर एक प्रभारी नियुक्त किया जाएगा, जो कमजोरियों को दूर करेगा। पार्टी का लक्ष्य हर बूथ पर 51% वोट शेयर हासिल करना है।

इसके लिए पन्ना प्रमुखों को एक्टिव कर घर-घर संपर्क अभियान चल रहा है। जातिगत समीकरण साधने के लिए SC-ST और अन्य प्रभावी वर्गों पर फोकस है। नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा पहुंचाने को कहा गया है। इन कठिन सीटों पर मंत्रियों और कोर ग्रुप के दिग्गज नेताओं को प्रभारी बनाया गया है।

बीजेपी के लिए चुनौती वाली सीटें
- राघौगढ़ (गुना): 1977 से कांग्रेस का गढ़।
- चुरहट (सीधी): बीजेपी सिर्फ 2 बार ही जीत पाई है।
- उत्तर विधानसभा (भोपाल): 1998 से कांग्रेस के पास।

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