मध्य प्रदेश
भाजपा में दो नेताओं को 'फ्रेम' में आने का लगा चस्का पार्टी की प्रत्येक फोटो में रहते हैं मौजूद
वक्त के साथ भाजपा और भाजपा के कार्यकर्ताओं की सोच तेजी से बदलने लगी है। दिखावे की दुनिया में कुछ करो अथवा नहीं दिखते जरुर रहो उसी बात को अंगीकार कर भा...
• Nov 5, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: भाजपा में दो नेताओं को 'फ्रेम' में आने का लगा चस्का पार्टी क
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वक्त के साथ भाजपा और भाजपा के कार्यकर्ताओं की सोच तेजी से बदलने लगी है। दिखावे की दुनिया में कुछ करो अथवा नहीं दिखते जरुर रहो उसी बात को अंगीकार कर भाजपा के दो नेताओं ने पार्टी की प्रत्येक फोटो में रहने की कसम खा ली है। इन दोनों कार्यकर्ताओं को फ्रेम में बने रहने का चस्का इस कदर लग गया है कि अब किसी भी ग्रुप फोटो में इन दोनों कार्यकर्ताओं को देखा जा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष के निवास से लेकर सीएम हाउस तक की प्रत्येक फोटो में दोनों कार्यकर्ता तस्वीर में जरुर नजर आएंगे। बीजेपी मीडिया विभाग की तरफ से जब भी कोई बाइट जारी की जाती है तो उसमें विशेष तौर पर ध्यान दिया जाता है कि दोनों कार्यकर्ता फ्रेम में हैं अथवा नहीं। वाट्सेप ग्रुप में वही फोटो डाली जाती है जिसमें दोनों कार्यकर्ता मौजूद हों। इन दोनों कार्यकर्ताओं की एक खूबी है जब भी बीजेपी कार्यालय में कोई बाइट होती है तो दोनों कार्यकर्ता अध्यक्ष अथवा अन्य किसी नेता के दाएं-बाएं ऐसे खड़े होते हैं कि कैमरामैन अपना फ्रेम कितना भी टाइट कर लें लेकिन उन दोनों कार्यकर्ताओं को वो फ्रेम से बाहर नहीं कर सकते। इन दोनों कार्यकर्ताओं ने मीडिया में दिखने और बिकने का ऐसा नायाब तरीका निकाल लिया है जिसे कोई सोच भी नहीं पाया और दोनों कार्यकर्ता पिक्चर में भी आ गए। भाजपा में कुछ महीने पहले ये स्थिति नहीं थी। जब तक आशीष अग्रवाल मीडिया प्रभारी थे तब तक फ्रेम में आने की लड़ाई नहीं थी लेकिन उनके दिल्ली जाते ही ऐसा माहौल बना कि अब खेल ही फ्रेम का आ चुका है। दरअसल यह एक शार्ट कट तरीका है जिसके माध्यम से यह कार्यकर्ता अध्यक्ष की नजरों में अपना काम दिखाने की होड़ लगाए रहते हैं। दोनों कार्यकर्ता अध्यक्ष के निवास पर भी पाए जाते हैं। स्थिति ये है कि जिसको वो चाहेंगे वो ही अध्यक्ष से मिल पाएगा। शायद इस बात की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को भी नहीं है कि उनके पीछे उन्हीं के निवास पर क्या हो रहा है। क्योंकि प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तरीके से ये दोनों कार्यकर्ता खुद फ्रेम में बने रहना चाहते हैं। प्रदेश मीडिया प्रभारी सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं। उनकी ज्यादा महत्वकांक्षाएं नहीं हैं लिहाजा वो खुद तो फ्रेम से दूर रहते हैं और अपने काम पर फोकस करते हैं लेकिन उनके पीछे दोनों कार्यकर्ता फ्रेम का खेला खेलने में व्यस्त हैं जिसको अब तक शायद किसी ने नोटिस नहीं किया है। लेकिन मुखबिर की नजर इन दोनों पर है। और मंगलवार को सीएम हाउस में आयोजित लंच के बाद जब ग्रुप फोटो हुई तो उसमें भी दोनों कार्यकर्ता फ्रेम में नजर आए।
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