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मध्य प्रदेश

एमपी बीजेपी में नाराज 'फुफाओ' की बढ़ती संख्या बनेगी चुनावी बाधा मौके को भुनाने के चक्कर में कांग्रेस

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के प्रति सिर्फ जनता ही नाराज नहीं हैं बल्कि भाजपा के दर्जन भर से अधिक नेता भी पार्टी और सरकार से नाराज चल रहे हैं। दरअसल भा...

• Oct 26, 2026• 3 min read
एमपी बीजेपी में नाराज 'फुफाओ' की बढ़ती संख्या बनेगी चुनावी बाधा मौके को भुनाने के चक्कर में कांग्रेस

📷 Cover Photo: एमपी बीजेपी में नाराज 'फुफाओ' की बढ़ती संख्या बनेगी चुनावी ब

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मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के प्रति सिर्फ जनता ही नाराज नहीं हैं बल्कि भाजपा के दर्जन भर से अधिक नेता भी पार्टी और सरकार से नाराज चल रहे हैं। दरअसल भाजपा में जिस प्रकार से वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का दौर चल पड़ा है उसको भाजपा का नेतृत्व आंख मूंद कर देख रहा है। प्रदेश की जनता जानती है कि भाजपा के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा लेकिन पार्टी के पदाधिकारी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि पार्टी के ही वरिष्ठ नेता सत्ता और संगठन से नाराज चल रहे हैं। खास बात यह है कि भाजपा के ऐसे नेता इस वक्त पार्टी से नाराज चल रहे हैं जो भाजपा की रीढ़ माने जाते थे। जिन नेताओं ने प्रदेश में भाजपा को स्थापित करने में अपना खून पसीना बहा दिया उन्हीं नेताओं को सत्ता और संगठन में ऐसे दरकिनार किया जा रहा है जैसे वो दूध में पड़ी मक्खी हों। नाराज नेताओं में प्रदेश का प्रत्येक अंचल शामिल है। मालवा से कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता की नाराजगी किसी से नहीं छुपी है। महाकौशल से अजय विश्नोई,प्रहलाद पटेल,सीताशरण शर्मा और राकेश सिंह जैसे नेता नाराज हैं। ग्वालियर-चंबल में भाजपा के करीब सभी नेता पार्टी से नाराज हैं। बुंदेलखंड में भूपेन्द्र सिंह और गोपाल भार्गव जैसे बड़े नेता नाराज हैं। विंध्य में राजेन्द्र शुक्ल के कारण कार्यकर्ता और पदाधिकारी नाराज हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी अब किसी से नहीं छुपी है वो पहले ही सतह पर आ चुकी है। इतने नाराज़ फुफाओं को भाजपा ढो रही है। मजे की बात यह है कि सत्ता और संगठन को इन सभी नाराज नेताओं की जानकारी है लेकिन पार्टी अथवा सरकार की तरफ से अब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है जिससे नाराज फुफाओं को मनाया जा सके। भाजपा में नाराजगी पहले भी होती थी लेकिन सतह पर नहीं आती थी अब नाराज नेताओं की नाराजगी सतह पर आने लगी है यहां तक कि अपनी ही पार्टी और सरकार के विरोध में भी कार्यकर्ता खड़ा होने लगे हैं। समय रेत की तरह फिसलता जा रहा है। देखते ही देखते मोहन सरकार के तीन साल बीतने चले और नाराज फुफाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जिस पर भाजपा अब भी ध्यान नहीं दे रही है। सरकार चल रही है समय कट रहा है। यह नाराजगी भाजपा के नेतृत्व को भले नहीं दिख रही है लेकिन कांग्रेस को दिख रही है। यही कारण है कि कांग्रेस इस नाराजगी का फायदा उठाने में जुट गई है। कांग्रेस अलग-अलग अभियान चला कर अपनी जड़ें तो मजबूत करने का काम कर ही रही है साथ ही भाजपा में सेंधमारी का भी प्रयास कर रही है। कांग्रेस को इस बात का अहसास है कि चुनाव आते-आते भाजपा सभी नेताओं को मना लेगी उसके पहले ही इन नेताओं के बीच सेंधमारी कर ली जाए जिससे कांग्रेस के लिए भी रास्ता तेयार हो जाएगा। ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब भाजपा में लंबे समय तक नेताओं की नाराजगी चली हो और उन्हें मनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया हो। नए संगठन महामंत्री ने भी अपना काम शुरु कर दिया है लेकिन शायद अब तक उनकी नजर नाराज फुफाओं को मनाने पर नहीं टिकी है।

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