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मध्य प्रदेश

'अंत नहीं आरंभ है ये 'दतिया में डॉ नरोत्तम मिश्रा के बंगले पर उमड़ा जनसैलाब 'दादा' के दीदार को आतुर दिखी जनता

दतिया। चुनाव में हार-जीत आंकड़ों का खेल है, लेकिन दिल जीतना ही जननायक की असली पहचान है

• Oct 25, 2026• 2 min read
'अंत नहीं आरंभ है ये  'दतिया में डॉ  नरोत्तम मिश्रा के बंगले पर उमड़ा जनसैलाब 'दादा' के दीदार को आतुर दिखी जनता

📷 Cover Photo: 'अंत नहीं आरंभ है ये...'दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बंगल

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दतिया। चुनाव में हार-जीत आंकड़ों का खेल है, लेकिन दिल जीतना ही जननायक की असली पहचान है। ये कहावत एक बार फिर दतिया में सच साबित हुई। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के दतिया पहुंचते ही उनके निवास पर ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि तस्वीरें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गईं।

भीड़ का शोर एक ही बात कह रहा था - 'अंत नहीं, आरंभ है ये, दतिया की जनता का शंखनाद है ये'।

'दादा' मतलब घर का बड़ा बेटा
दतिया की जनता पूर्व गृह मंत्री को प्यार से 'दादा' कहकर पुकारती है। दादा का मतलब बड़ा भाई, घर का बड़ा बेटा। और इस रिश्ते को डॉ. मिश्रा भी पूरी शिद्दत से निभाते हैं। दतिया के हर घर से आया व्यक्ति, चाहे वो बच्चा ही क्यों न हो, दादा उसे नाम से जानते हैं। यही वजह है कि चुनाव परिणाम भले ही पक्ष में न रहे हों, लेकिन जनता का विश्वास आज भी बरकरार है।

शनिवार को जैसे ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा अपने निवास पर पहुंचे, लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिलाएं... हर कोई अपने 'दादा' से मिलने को बेताब नजर आया।

सियासी गलियारों में चुभ रही हैं तस्वीरें
निवास पर उमड़ी भीड़ की तस्वीरें अब सियासी गलियारों में शूल की तरह चुभ रही हैं। विरोधियों को जहां यह जनसमर्थन हजम नहीं हो रहा, वहीं उनके करीबियों के दिल में भी यह जनसैलाब कई सवाल खड़े कर रहा है।

कहते हैं, किसी को हराया तो जा सकता है, लेकिन उसके हौसले को तब तक नहीं हराया जा सकता, जब तक वो खुद हार न मान ले। पूर्व गृह मंत्री का हौसला भी कुछ ऐसा ही है और उस हौसले को ऊर्जा दे रहा है यह जनसैलाब, जो उनके एक दीदार के लिए घंटों से आतुर था।

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