Breaking
Stay connected for the latest news and exclusive updates...
मध्य प्रदेश

'विचौलियों' को बढ़ावा देती एमपी बीजेपी की सरकार युवाओं को 'आउटसोर्स' में नौकरी देकर 'कमीशन' का कर रही खेला

मध्य प्रदेश के सभी शासकीय विभाग आउटसोर्स के तहत रखे गए कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। इन आउटसोर्स कर्मचारियों की जिंदगी बाहर से बड़ी अच्छी लगती है ल...

• Oct 25, 2026• 3 min read
'विचौलियों' को बढ़ावा देती एमपी बीजेपी की सरकार युवाओं को 'आउटसोर्स' में नौकरी देकर 'कमीशन' का कर रही खेला

📷 Cover Photo: 'विचौलियों' को बढ़ावा देती एमपी बीजेपी की सरकार युवाओं को 'आ

ADVERTISEMENT
Font Size:
मध्य प्रदेश के सभी शासकीय विभाग आउटसोर्स के तहत रखे गए कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। इन आउटसोर्स कर्मचारियों की जिंदगी बाहर से बड़ी अच्छी लगती है लेकिन इनकी गृहस्थी की तरफ झांक कर देखा जाए तो पीठे पर खड़ा रहने वाला एक मजदूर आउटसोर्स कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा खुश हैं क्योंकि उसका सोषण नहीं हो रहा वो अपनी मर्जी से काम पर जाता है और पहले ही अपनी मजदूरी फिक्स कर लेता है। लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों के पास ये आप्शन नहीं है क्योंकि वो पढ़े-लिखे हैं। जीवन भर पढ़ाई करके तगाड़ी और फावड़ा थाम नहीं सकते लिहाजा आउटसोर्स नौकरी के अलावा उनके पास कोई दूसरी च्वाइस नहीं है। थक हार कर वो आउटसोर्स नौकरी ज्वाइन करते हैं और महीने में उन्हें महज 14 से 16 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है बदले में कंपनियां उनसे दस से 12 घंटे काम करवाती हैं मना करने पर नौकरी से बाहर करने की धमकी दे दी जाती है। अब यहां से शुरु होता है कमीशन का खेल। प्रत्येक विभाग में निजी कंपनियों को सरकार की तरफ से हायर किया गया है जो कर्मचारी देने का काम करती हैं। सभी कंपनियों को टेंडर के तहत एक मोटा अमाउंट सरकार की तरफ से प्रत्येक महीने दिया जाता है। यहां पर ठेकेदार और विभाग के बड़े अधिकारी के बीच भी 'कमीशन' का बड़ा खेला होता है। क्योंकि संबंधित विभाग में जो भी बड़ा अधिकारी होता है उसी को बिल पास करने का अधिकार होता है ऐसी स्थिति में वो अधिकारी कंपनियों से अपना कमीशन फिक्श करके रखता है। ठेकेदार जिसने कर्मचारियों को रखा हुआ है उसको भी उसी में अपना मुनाफा निकालना है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बंदरवाट में कर्मचारी आटे में घुन कर पिसता रहता है। उसके हिस्से में महज 14 से 16 हजार रुपये आते हैं और उसको अपने परिवार का पेट पालने में दिक्कत होती है। इन्हीं आउट सोर्स कर्मचारियों के अकाउंट में अगर सरकार सीधे वेतन डालने का काम करें और किसी एक अधिकारी को उनकी मानीटरिंग के लिए रखे तो शायद आउटसोर्स में रखे गए कर्मचारियों की जिंदगी कुछ हद तक बेहतर हो सकती है। क्योंकि सरकार जो पैसा विचौलियों को दे रही है वहीं पैसे डायरेक्ट कर्मचारियों के खाते में आएगा तो कमीशन का खेला नहीं होगा और आउटसोर्स कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन मिल सकेगा। मजे की बात तो यह है कि भाजपा की सरकार प्रत्येक मंच पर छाती ठोंक कर कहती है कि भाजपा की सरकार ने विचौलियों के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं। लेकिन हकीकत तो यह है कि बिचौलियों के लिए अब सरकार ने एक ऐसे हाइवे का निर्माण कर दिया है जिससे वो दिन दुगनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। और युवा वर्ग पेट पालने के लिए उन बिचोलियों की चाकरी करने के लिए मजबूर हैं।

Reader Reactions

What is your reaction to this story?
ADVERTISEMENT
📢 Share this story with friends & WhatsApp groups:

Reader Discussion & Comments (0)

Moderated Comments

Leave a Comment

Loading comments...
ADVERTISEMENT