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मध्य प्रदेश

'टाट-दरी' बिछाएंगे एमपी बीजेपी के कार्यकर्ता 'मलाई' खाएंगे हरदीप सिंह पुरी राष्ट्रीय नेतृत्व को एमपी से नहीं मिला 'योग्य' उम्मीदवार

मध्य प्रदेश कोटे से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवार का ऐलान कर 'हरदीप सिंह' पुरी के नाम पर अंतिम म...

• Oct 28, 2026• 3 min read
'टाट-दरी' बिछाएंगे एमपी बीजेपी के कार्यकर्ता 'मलाई' खाएंगे हरदीप सिंह पुरी राष्ट्रीय नेतृत्व को एमपी से नहीं मिला 'योग्य' उम्मीदवार

📷 Cover Photo: 'टाट-दरी' बिछाएंगे एमपी बीजेपी के कार्यकर्ता 'मलाई' खाएंगे ह

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मध्य प्रदेश कोटे से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवार का ऐलान कर 'हरदीप सिंह' पुरी के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है। पंजाब से आने वाले हरदीप सिंह पुरी एमपी बीजेपी कोटे से दूसरे पंजाबी होंगे। उनसे पहले तरुण चुघ भी एमपी के कोटे ही ही राज्यसभा भेजे गए हैं जो मूल रुप से पंजाब के रहने वाले हैं और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। हरदीप सिंह पुरी लोकप्रिय तो नहीं लेकिन काफी कंट्रोवर्सियल नेता के रुप में माने जाते हैं। उनको लेकर अलग-अलग तरह के कई आरोप भी हैं। वहीं एमपी कोटे से हरदीप सिंह पुरी के नाम का ऐलान होने के बाद बीजेपी के कई नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया है तो कई नेताओं के हलक से पानी नहीं उतर रहा है। केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा लिए गए इस फैसले से एमपी बीजेपी के कार्यकर्ताओं में आक्रोश का भाव देखने को मिला है। कुछ कार्यकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि एमपी के कार्यकर्ता टाट-दरी बिछाने का ही काम करेंगे क्या? क्योंकि जब बगैर मेहनत किए राज्यसभा में दूसरे राज्य के व्यक्ति को भेजा जा रहा है तो उसका मतलब तो यही है कि एमपी बीजेपी में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को या तो योग्य नेता नहीं मिला अथवा एमपी के कार्यकर्ताओं को बीजेपी का राष्ट्रीय नेतृत्व सिर्फ टाट-दरी बिछाने वाला कार्यकर्ता ही मान कर चल रही है। गौरतलब है कि दो दिन पहले सीएम हाउस में बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक हुई थी जिसमें पांच नामों का पैनल भेजे जाने की बात सामने आई थी। लेकिन अब सवाल इस बात का भी उठ रहा है कि अगर दिल्ली को अपनी मनमानी ही करनी थी और उन्हें बाहर के उम्मीदवार को ही एमपी से राज्यसभा भेजना था तो इतना प्रोपोगेंडा क्यों किया गया। क्योंकि हरदीप सिंह पुरी को एमपी से भेजने का कोई लाजिक भी नहीं दिख रहा है। एमपी में सिक्ख समाज की इतनी बड़ी संख्या भी नहीं है कि उनको साधने का प्रयास किया जा रहा है। पंजाब के विधानसभा चुनाव को देखते हुए जरुर भाजपा का यह कदम उचित हो सकता है लेकिन एमपी बीजेपी के कार्यकर्ताओं को नाराज कर दूसरे को खुश करने की बात समझ से परे हो रही है।

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