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मध्य प्रदेश

भाजपा में सुलगती विद्रोह की आग विकराल रुप लेने की कगार पर पहुंची संगठन के आगे होगी बड़ी चुनौती

मध्य प्रदेश भाजपा में हो रहे अप्रत्याशित फैसलों के चलते न सिर्फ बड़े नेता नाराज नजर आ रहे हैं बल्कि पार्टी के वो कार्यकर्ता भी नाराज़ नजर आ रहे हैं जो...

Sep 5, 2026 Updated: Sep 5, 2026 3 min read
भाजपा में सुलगती विद्रोह की आग विकराल रुप लेने की कगार पर पहुंची संगठन के आगे होगी बड़ी चुनौती

📷 Cover Photo: भाजपा में सुलगती विद्रोह की आग विकराल रुप लेने की कगार पर पह

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मध्य प्रदेश भाजपा में हो रहे अप्रत्याशित फैसलों के चलते न सिर्फ बड़े नेता नाराज नजर आ रहे हैं बल्कि पार्टी के वो कार्यकर्ता भी नाराज़ नजर आ रहे हैं जो टाट और दरी बिछाने का काम करते हैं। क्योंकि भाजपा की परंपरा रही है कि यहां पर आपसी सहमति से सारे फैसले लिए जाते थे लेकिन कुछ महीनों में फैसले लेने के तौर तरीकों में बदलाव आया है और नतीजा यह निकला कि अब भाजपा के नेतृत्व द्वारा फैसले थोपे जा रहे हैं। पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता फैसलों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। कार्यकर्ताओं के बीच यही कानाफूसी होती रहती है कि पार्टी के फैसले ले कौन रहा है। दरअसल भाजपा में अप्रत्याशित फैसलों की शुरुआत साल 2023 विधानसभा चुनाव से शुरु हुआ जब पांच सांसदों को अचानक विधानसभा चुनाव के लिए भेजा गया। उस वक्त कार्यकर्ता यह मान कर चुप रहे कि पार्टी का यह मास्टर स्ट्रोक है क्योंकि उस वक्त प्रदेश भर में भाजपा विरोधी लहर थी। लेकिन भाजपा जब प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आई तो अप्रत्याशित फैसलों का सिलसिला लगातार चलता रहा जो पार्टी के कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरने लगा। कांग्रेस से तथाकथित नेताओं को भी पार्टी में महत्व मिलने लगा जिसके कारण भाजपा के मूल कार्यकर्ता पीछे छूटने लगे। और अब तो हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि भाजपा कार्यालय के बजाय कहीं और से ही फैसले लिए जा रहे हैं अथवा यह भी कहा जा सकता है कि फैसले थोपे जा रहे हैं। जिस प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ देखने को मिला करती थी आज उसी प्रदेश कार्यालय में गिनती के कार्यकर्ता देखने को मिलते हैं। जो पदाधिकारी हैं वो भी बेमन होकर कार्यालय आते हैं। प्रत्येक कार्यकर्ता की जुवान से यही शब्द निकलता है कि फैसले कौन ले रहा है। कुछ कार्यकर्ता तो यहां तक कहते हैं कि अब भाजपा की स्थिति कांग्रेस से भी बद्तर हो चुकी है। हांलांकि बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहज और सरल व्यक्तित्व के नेता हैं और लगातार कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने का प्रयास भी करते हैं लेकिन समस्याएं सिर्फ सुनने से कुछ नहीं होगा जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होगा और कार्यकर्ताओं के मन में चल रहा अस्थिरता का दौर खत्म नहीं होगा तब तक भाजपा मिशन 28 की ओर नहीं बढ़ पाएगी।

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