मध्य प्रदेश
मोहन राज में मौत का ट्रेलर सिरप ने छिंदवाड़ा में 25 बच्चे निगले पानी ने इंदौर में 22 शराब ने सागर में 36 और कुपोषण ने बालाघाट में 32 मासूमों की जान ली
भोपाल* मध्यप्रदेश में साल 2023 के बाद मौत तांडव कर रही है। लेकिन सरकार मस्त चल रही है
• Nov 1, 2026• 5 min read

📷 Cover Photo: > *मोहन राज में मौत का ट्रेलर सिरप ने छिंदवाड़ा में 25 बच्चे
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भोपाल* मध्यप्रदेश में साल 2023 के बाद मौत तांडव कर रही है। लेकिन सरकार मस्त चल रही है। जनता के दिल के ज़ख्म भरने से पहले दूसरे जख्म बन जाते हैं और जांच के नाम पर सरकार सबको चुप कर देती है। इन मौतों का सिलसिला छिंदवाड़ा, पांढुर्ना और बैतूल जिले से शुरु हुआ था जहां जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत हुई थी।
फैक्ट क्या है -
- 22 बच्चों की मौत किडनी फेलियर से हुई थी, जिसे बाद में SIT ने 24-25 तक बताया।
- आरोपी सिरप का नाम - Coldrif कफ सिरप, बैच नं. SR-13। लैब जांच में इसमें 46.28% डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मिला, जो घातक स्तर का जहर है।
- परासिया के डॉ. एसएस ठाकुर और डॉ. प्रवीण सोनी पर आरोप - 4 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित सिरप लिखने का।
- मेडिकल स्टोर ने CPP सिरप की जगह Coldrif दे दिया, जिससे 3.5 साल के मयंक सूर्यवंशी की मौत हो गई।
- SIT ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें तमिलनाडु की श्रीसन फार्मा कंपनी के मालिक रंगनाथन, केमिकल सप्लायर और मेडिकल संचालक शामिल हैं।
- पुलिस ने 4500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, लेकिन अभी भी बिसरा और विशेषज्ञ रिपोर्ट आना बाकी है। fbdd2710
सरकार का एक्शन - ड्रग कंट्रोलर की रिपोर्ट के बाद केंद्र ने इंडियन फार्माकोपिया में संशोधन कर अब हर ओरल लिक्विड सिरप में DEG जांच अनिवार्य कर दी है। MP में 4 सिरप पर साइलेंट बैन लगा है।
2. इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड - सीवर का पानी बना मौत की वजह
इंदौर - देश के सबसे स्वच्छ शहर में सबसे बड़ा जल-संकट।
फैक्ट क्या है -
- भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते से उल्टी, दस्त, पेट दर्द के मामले बढ़े। कुल 36 लोगों की मौत का दावा, जिसमें से न्यायिक आयोग ने 22 मौतों को सीधे दूषित पानी से जुड़ा माना है।
- हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग - अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता। आयोग ने 600 पन्नों की रिपोर्ट में कहा - यह एक दिन की चूक नहीं, बल्कि जल और सीवर नेटवर्क की योजना, निगरानी, रखरखाव में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों का परिणाम है।
- पानी के सैंपल में http://E.Coli और Total Coliform बैक्टीरिया मिला।
- पाइपलाइन 1990-95 की सीवर लाइन और 1999-2004 की पानी की लाइन, जो CPHEEO मानकों के अनुरूप नहीं थी।
- आयोग ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख मुआवजे और 8-10 अधिकारियों पर विभागीय जांच की सिफारिश की है।
3. सागर जहरीली शराब कांड - 36 मौतों ने हिला दिया बुंदेलखंड
सागर/बंडा - बंडा में जहरीली शराब पीने से 36 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को हिला दिया।
फैक्ट क्या है -
- घटना 5 सितंबर 2025 की रात से शुरू, लोग लगातार अस्पताल पहुंचे।
- पुलिस जांच में खुलासा - दिल्ली की RN केमिकल फर्म से 5 ड्रम औद्योगिक स्प्रिट और थिनर मंगाकर ततरवारा में नकली शराब बनाई गई, ग्वालियर से रैपर-बोतलें आईं। आरोपियों को पता था शराब जहरीली है, फिर भी बेची।
- सरकार ने न्यायिक जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित किया, मुख्यालय सागर, 3 महीने में रिपोर्ट।
- 31 अक्टूबर 2026 को आयोग की टीम ने बंडा पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए।
- पुलिस ने 52 लोगों पर FIR, 36 गिरफ्तार, 40 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर।
4. बालाघाट कुपोषण मामला - आदिवासी बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
बालाघाट - बैहर-बिरसा क्षेत्र के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत ने सिस्टम की पोल खोल दी।
फैक्ट क्या है -
- करीब 32 आदिवासी बच्चों की मौत का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और MP, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को CJI सूर्यकांत की बेंच ने की, जनहित याचिका अजब लाल लिल्हारे ने दायर की।
- केंद्र की NJORT (नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम) रिपोर्ट में खुलासा - जिले में महामारी विशेषज्ञ और माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पद खाली थे, IDSP यूनिट एक डेटा मैनेजर के भरोसे।
- सरकारी रिकॉर्ड में 65 मरीज दिखाए गए, जबकि जांच में 196 बीमार बच्चे मिले। इनमें 25 खसरा और 27 मलेरिया पॉजिटिव।
- 3 साल की बच्ची का वजन 4.9 किलो मिला, गंभीर कुपोषण, दूषित पीला पानी और टीकाकरण की कमी मुख्य कारण बताए गए।
- प्रशासन ने 57 गांवों में 49,553 लोगों की स्क्रीनिंग का दावा किया, वहीं राहुल गांधी ने जगला गांव पहुंचकर इसे शासन की विफलता बताया।
अब सवाल इस बात का उठ रहा है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग मामलों में मौत के मामले लगातार आ रहे हैं लेकिन सरकार ने अब तक एक भी ऐसा गंभीर कदम नहीं उठाया जिससे मृतकों के परिजनों के ज़ख्मों पर मरहम लग सके। इन मामलों में सरकार डिफेंस करने में व्यस्त रही और विपक्ष राजनीति करने तक सीमित रहा। सभी मामलों में जितनी सरकार दोषी है उतनी ही कांग्रेस की भूमिका भी संदिग्ध दिख रही है।
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