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मध्य प्रदेश

ये कैसी भाजपा है जहां हार का ठीकरा प्रदेश अध्यक्ष पर फोड़ा जाता है और संगठनात्मक नियुक्तियों की बात आए तो दूसरे नेता अपनी चलाएंगे

मध्य प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी को लेकर सत्ता और संगठन के बीच जोरदार खींचतान देखने को मिल रही है। मजे की बात ये है कि जब दतिया उप चुनाव की हार का ठीक...

Sep 19, 2026 Updated: Sep 19, 2026 3 min read
ये कैसी भाजपा है जहां हार का ठीकरा प्रदेश अध्यक्ष पर फोड़ा जाता है और संगठनात्मक नियुक्तियों की बात आए तो दूसरे नेता अपनी चलाएंगे

📷 Cover Photo: ये कैसी भाजपा है हार का ठीकरा प्रदेश अध्यक्ष पर फोड़ा जाता ह

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मध्य प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी को लेकर सत्ता और संगठन के बीच जोरदार खींचतान देखने को मिल रही है। मजे की बात ये है कि जब दतिया उप चुनाव की हार का ठीकरा फोड़ने की बात आई तो प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का नाम लिया गया और संगठनात्मक नियुक्तियों की बारी आई तो सीएम मोहन यादव सहित कुछ अन्य नेता अपनी चलाने लगते हैं।भाजपा में भी अजब और गजब फैसले देखने को मिल रहे हैं। दरअसल आशीष ऊषा अग्रवाल के राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के बाद पहली बार ऐसा मौका देखने को मिला है जब महीने भर से भाजपा में प्रदेश मीडिया प्रभारी नहीं है उसके बाद भी पार्टी की आंतरिक कलह के कारण प्रदेश मीडिया प्रभारी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। मुखबिर को मिली खबर के मुताबिक मीडिया प्रभारी को लेकर एक नाम सीएम मोहन यादव ने दिया है तो दूसरा एक बड़े पदाधिकारी ने दिया है।अब सवाल इस बात का उठता है कि जब संगठनात्मक नियुक्तियों में प्रदेश अध्यक्ष को फ्री हैंड नहीं किया जाएगा तो फिर उन पर हार का ठीकरा कैसे फोड़ा जा सकता है। ये बात किसी से छुपी नहीं है कि सत्ता और संगठन के बीच जो भी गतिरोध उभर कर सामने आए हैं वो दतिया उप चुनाव के बाद ही सार्वजनिक हुए हैं। और उस हार का ठीकरा भी प्रदेश अध्यक्ष पर ही फोड़ा गया। जबकि हकीकत उससे कोसों दूर है क्योंकि वहां पर नाम सीएम की सहमति से तय किया गया था प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तो पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा को ही चाहते थे। खबर ये भी है कि कुछ मीडिया कर्मियों ने भी मीडिया प्रभारी के लिए अपना नाम दिया है जबकि भाजपा संविधान के मुताबिक जो भी प्रदेश पदाधिकारी बनता है उसे न सिर्फ पार्टी का सदस्य होना जरुरी है बल्कि उसका सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में अगर किसी मीडिया कर्मी को प्रदेश प्रभारी बनाया जाता है तो उसका सक्रिय सदस्य होना जरुरी है। इसके अलावा दूसरा विकल्प यह है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर किसी को भी भाजपा का प्रदेश मीडिया प्रभारी बना सकते हैं। लेकिन यहां पर नाम तो सीएम और शिवप्रकाश तय कर रहे हैं ऐसी स्थिति में मीडिया प्रभारी के नाम पर किसके नाम पर मुहर लग सकती है यह तो एक बड़ा सवाल है। लेकिन इस बीच एक बात जरुर देखने को मिली है कि आशीष ऊषा अग्रवाल के राष्ट्रीय टीम में जाने के बाद कई लोग स्वयंभु मीडिया प्रभारी बन कर घूम रहे हैं। इनमें तो एक ऐसे स्वयंभु मीडिया प्रभारी इतने गंभीर नजर आए कि उन्होंने एक दिन मीडिया कर्मी को अपनी बाहों में भर कर बैठक कक्ष से बाहर कर दिया।

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