मध्य प्रदेश
'ब्राह्मण विरोधी' होती भाजपा में संगठन महामंत्री बनाए गए चन्द्रशेखर तिवारी लगाएंगे समन्वय का 'अंकुश'
ब्राह्मण बनियों की पार्टी कहलाने वाली भाजपा कब ओबीसी वर्ग की पार्टी में तब्दील हो गई यह खुद सवर्ण वर्ग को ही पता नहीं चल पाया। अच्छे दिन आएंगे कि चक्क...
• Sep 25, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: 'ब्राह्मण विरोधी' होती भाजपा में संगठन महामंत्री बनाए गए चन्
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ब्राह्मण बनियों की पार्टी कहलाने वाली भाजपा कब ओबीसी वर्ग की पार्टी में तब्दील हो गई यह खुद सवर्ण वर्ग को ही पता नहीं चल पाया। अच्छे दिन आएंगे कि चक्कर में सवर्ण वर्ग भाजपा को वोट देता रहा और दूसरों से दिलाता रहा लेकिन उसी भाजपा ने मौका पाते ही सवर्णों नेताओं को एक-एक करके ठिकाने लगा दिया। आज स्थिति ये है कि सवर्ण वर्ग खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। क्योंकि जिस सवर्ण वर्ग ने भाजपा की आधारशिला रही थी आज वही सवर्ण वर्ग भाजपा में अपना अस्तित्व तलाश रहा है। सवर्ण वर्ग के जितने भी नेता हैं उन्हें या तो ठिकाने लगा दिया गया है अथवा उनके मुंह में पारदर्शी टेप चिपका कर गांधी जी के तीन बंदरों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। जो न देंखें,न सुनेंगे और न ही बोलेंगे। भाजपा में उन्हीं सवर्ण वर्ग के नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है जो सबकुछ देख कर चुप रहें। जो बोलेंगे उनकी हालत डाक्टर नरोत्तम मिश्रा,अनूप मिश्रा,गोपाल भार्गव और अजय विश्नोई जैसी बना दी जाएगी। बांकी एक और नेता हैं जो पद में हैं और बोलते भी हैं कैलाश विजयवर्गीय लेकिन अब भाजपा ने उन्हें राहुल गांधी की श्रेणी में डाल दिया है। बोलते रहो जो भी बोलना है लेकिन उसका कोई मतलब नहीं निकलेगा। सरकार और संगठन के बीच भी सवर्ण और ओबीसी वर्ग को लेकर जमकर अंतरद्वंद चला। भोपाल से दिल्ली तक शिकायतों का दौर भी चला। अंत में प्रदेश अध्यक्ष को फ्री हैंड किया गया और सीएम की मनमानी में अंकुश लगाने के लिए चन्द्रशेखर तिवारी को प्रदेश संगठन महामंत्री नियुक्त कर दिया गया जो बांदा जिले से आते हैं। मोदी की कई योजनाओं का हिस्सा रहे चन्द्रशेखर तिवारी एक कुशल संगठक के रुप में जाने जाते हैं। साथ ही कड़क मिजाज के हैं दूसरों के दबाव में न आकर खुद फैसला लेने पर विश्वास रखते हैं। गोस्वामी तुलसीदास की नगरी से आने वाले चन्द्रशेखर तिवारी के सामने एमपी बीजेपी की बड़ी चुनौतियां हैं। जिसके तहत न सिर्फ सरकार और संगठन के बीच समन्वय बनाए रखना है बल्कि भाजपा में जल रही विद्रोह की आग को बुझाना है। क्योंकि जिस प्रकार से भाजपा नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है वो लड़ाई अब विद्रोह का रुप धारण कर चुकी है। ऐसी स्थिति में चन्द्रशेखर तिवारी के सामने भाजपा के नेता ही चुनौती बन कर खड़े हैं उसके बाद कार्यकर्ताओं की बारी आती है।
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