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मध्य प्रदेश

हेमंत खंडेलवाल जिन्होंने भाजपा को 'क्लीन स्वीप' का रास्ता दिखाया अब संगठन को गढ़ने का कर रहे काम

मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बेहद ही शांत और सरल व्यक्तित्व के नेता माने जाते हैं। जो बोलते कम और काम ज्यादा करने पर विश्वास रखते हैं

Sep 23, 2026 3 min read
हेमंत खंडेलवाल जिन्होंने भाजपा को 'क्लीन स्वीप' का रास्ता दिखाया अब संगठन को गढ़ने का कर रहे काम

📷 Cover Photo: हेमंत खंडेलवाल जिन्होंने भाजपा को 'क्लीन स्वीप' का रास्ता दि

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मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बेहद ही शांत और सरल व्यक्तित्व के नेता माने जाते हैं। जो बोलते कम और काम ज्यादा करने पर विश्वास रखते हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में जब उन्हें चुनाव प्रबंधन समिति का प्रदेश संयोजक बनाया गया तो किसी को यह नहीं मालूम था कि वो ऐसा कारनामा कर गुजरेंगे जिसकी किसी भाजपा नेता ने कल्पना भी नहीं की थी। हेमंत ने अपनी टीम में चुन-चुन कर सदस्यों को शामिल किया और फिर अपनी रणनीति को धरातल में उतारना शुरु किया। हेमंत रणनीति बना कर सभी सीटों में पार्टी की योजना को धरातल में उतारने का काम कर रहे थे तो दूसरी तरफ पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस में सेंध लगाने का काम कर रहे थे। नरोत्तम मिश्रा को न्यू ज्वाइनिंग कमेटी का प्रदेश संयोजक बनाया गया था। दोनों नेताओं की ऐसी जुगलबंदी देखने को मिली जो भाजपा के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। दोनों नेताओं ने अपनी भूमिका को ऐसे अंजाम दिया जिससे एमपी में पहली बार भाजपा ने 29 की 29 लोकसभा सीट जीतने में कामयाबी हासिल की। जो छिंदवाड़ा भाजपा के लिए अभेद्य किला मानी जाती थी उस छिंदवाड़ा के किले में सुरंग बना कर जीत हासिल करने में कामयाबी हासिल की। अब वही हेमंत खंडेलवाल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं शुरु में धीमी लेकिन सनी हुई शुरुआत करने वाले हेमंत ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के तीन महीने के अंदर ही प्रदेश कार्यकारिणी घोषित करने में कामयाबी हासिल की। इस कामयाबी का नतीजा यह निकला कि पार्टी के अंदर अदृश्य रुप से छिपे उनके विरोधियों ने जड़ खोदनी शुरु कर दी और उनके नेतृत्व को कमजोर साबित करने का प्रयास करने लगे। ऐसा भी नहीं था कि प्रदेश अध्यक्ष को कुचक्रों की जानकारी नहीं थी। बीजेपी अध्यक्ष को पीठ पीछे होने वाली सारी साजिशों की जानकारी थी। उन्होंने पहले विरोधियों को साजिश के कुचक्र को रचने का पूरा मौका दिया क्योंकि उन्हें उस साजिश से कैसे निकलना है उसकी जानकारी थी। यही कारण है कि पिछले दिनों भाजपा में जम कर अस्थिरता का माहौल देखने को मिला। जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी चाल चलनी शुरु की सारे मोहरे एक झटके में धराशाही हो गए। जिसकी बानगी के रुप में उन्होंने हाल ही में दो नियुक्तियां की हैं जिसके तहत शिवराज डाबी को सोशल मीडिया विभाग का प्रदेश संयोजक बनाया तो अजय शर्मा को संकुल प्रकोष्ठों का सह संयोजक नियुक्त कर यह बता दिया कि साजिशों के समंदर से कस्ती निकालने का हुनर उन्हें आता है। अब प्रदेश अध्यक्ष फ्रंट फुट पर आ चुके हैं और जल्द ही पार्टी में उनकी मजबूत भूमिका और सशक्त नेतृत्व की पहचान देखने को मिलने वाली है।

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