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मध्य प्रदेश

ग्वालियर-चंबल की बंजर होती सियासी जमीन में संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर तिवारी और विप्लव देव कैसे नई पौध तैयार करेंगे यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब आना बांकी

ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति का एक ही मकसद है- सत्‍ता और उसके माध्यम से पावर हासिल करना।सिंधिया को जनसेवा या जनकल्‍याण से कोई वास्‍ता नहीं है

• Sep 30, 2026• 3 min read
ग्वालियर-चंबल की बंजर होती सियासी जमीन में संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर तिवारी और विप्लव देव कैसे नई पौध तैयार करेंगे यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब आना बांकी

📷 Cover Photo: ग्वालियर-चंबल की बंजर होती सियासी जमीन में संगठन महामंत्री च

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ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति का एक ही मकसद है- सत्‍ता और उसके माध्यम से पावर हासिल करना।सिंधिया को जनसेवा या जनकल्‍याण से कोई वास्‍ता नहीं है। सिंधिया इस दौर में भी बिना सिंघासन के राजा बने रहना चाहते हैं। यही कारण है कि ग्वालियर-चंबल की राजनीति में अगर कोई नेता आगे बढ़ने लगता है अथवा महाराज साहब के चरणों की वंदना नहीं करता तो उसे धीरे से ठिकाने लगा दिया जाता है। कमलनाथ सरकार के दौरान भी सिंधिया ने यही किया था। अपने पिछलग्‍गू गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी और प्रदुम्न सिंह तोमर जैसे नेताओं के बल पर अपनी राजनीति सेंकते रहते हैं। सिंधिया की राजनीति में एक दौर ऐसा रहा है जब ग्वालियर-चंबल की सियासत में उनका नाम ही काफी माना जाता था। राजघराने की विरासत, कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में पहचान और ग्वालियर-चंबल में मजबूत व्यक्तिगत नेटवर्क- इन सबने मिलकर सिंधिया को मध्यप्रदेश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल किया। लेकिन राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होता कि किसी नेता का अतीत कितना मजबूत रहा है। सवाल यह होता है कि आज जमीन पर उसकी पकड़ कैसी है? यही सवाल इन दिनों सिंधिया के सामने खड़ा दिखाई दे रहा है। ग्वालियर में उनके कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाए गए। विरोध के बाद कार्यक्रम स्थल पर समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई की स्थिति बनी। घटना कुशवाहा समाज के छात्रावास एवं सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान हुई। इसी दौर में गुना से उनके तेवर वाले वीडियो सामने आते हैं, स्थानीय स्तर पर राजनीतिक विरोध के आरोप लगते हैं और ग्वालियर में भाजपा के अंदर ही गुटीय खींचतान की चर्चा तेज होती है, तब सवाल बड़ा हो जाता है। इस सवालों का जवाब अब बीजेपी के नव नियुक्त संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर तिवारी और प्रदेश प्रभारी विप्लव देव को ढूंढ़ना है। क्योंकि सिंधिया खुद तो मजबूत हो रहे हैं लेकिन भाजपा पूरी तरह से खोखली होती जा रही है। जिस चंबल की माटी से बीजेपी को नेताओं की खेप मिला करती थी आज उस चंबल की माटी को बंजर बनाने का काम किया जा रहा है। अब नव नियुक्त पदाधिकारी बंजर होती जमीन पर किस प्रकार से नेताओं की फसल तेयार करेंगे यह एक बड़ा सवाल है।

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