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मध्य प्रदेश

भाजपा में छिड़े 'गृह युद्ध' पर कैसे लगाम कसेंगे विप्लव और चन्द्रशेखर तिवारी परिस्थिति विकट लेकिन उपाय जरुरी

मिशन 28 के लिए कमर कस रही मध्य प्रदेश भाजपा में गृह युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। पार्टी के जितने भी वरिष्ठ नेता हैं वो खुद की उपेक्षा से आहत हैं

• Oct 2, 2026• 2 min read
भाजपा में छिड़े 'गृह युद्ध' पर कैसे लगाम कसेंगे विप्लव और चन्द्रशेखर तिवारी परिस्थिति विकट लेकिन उपाय जरुरी

📷 Cover Photo: भाजपा में छिड़े 'गृह युद्ध' पर कैसे लगाम कसेंगे विप्लव और चन

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मिशन 28 के लिए कमर कस रही मध्य प्रदेश भाजपा में गृह युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। पार्टी के जितने भी वरिष्ठ नेता हैं वो खुद की उपेक्षा से आहत हैं। जिन नेताओं ने अपना पूरा जीवन पार्टी को दे दिया उन्हीं नेताओं को अब पार्टी में वो महत्व नहीं मिलता जिसके वो अधिकारी हैं। खास कर मोहन यादव के सीएम बनने के बाद वरिष्ठ नेताओं को जिन उपेक्षाओं का शिकार होना पड़ रहा है उससे परिचित अब प्रदेश की जनता भी है। महाकौशल,विंध्य,मालवा,ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड सहित प्रदेश के प्रत्येक अंचलों में भाजपा नेताओं के बीच आपसी विवाद पूरे शबाब पर है। जो सामान्य वर्ग से नेता आते हैं उन्हें एक-एक करके ठिकाने लगाने और घर बैठाने का काम किया जा रहा है। यह हालात सिर्फ सामान्य वर्ग के बड़े नेताओं तक ही सीमित नहीं बल्कि सामान्य वर्ग से आने वाले कार्यकर्ताओं को भी पार्टी में उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। जबकि भाजपा में सामान्य वर्ग ही कोर वोटर माना जाता है और उसी सामान्य वर्ग को भाजपा पूरी तरह से ठिकाने लगाने का काम कर रही है। फ्री की योजनाओं से सत्ता के शिखर तक पहुंच रही भाजपा नेतृत्व को इस बात का अहसास नहीं हो रहा कि लालच का भी समय आता है। जिस दिन उपेक्षा गले तक पहुंच जाएगी उस दिन फ्री की योजनाएं भी भाजपा की जीत का रास्ता तय नहीं कर पाएंगी। हाल ही में एमपी बीजेपी के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी विप्लव देव और संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर तिवारी ने पहले कोरग्रुप की बैठक की अगले दिन संभाग प्रभारियों की बैठक की जिसमें मोदी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और प्रचारित करने के लिए कहा गया है। अब सवाल इस बात का उठता है कि सरकार ने इतना काम किया है तो ढिंढोरा पीटने की क्या जरुरत है। विकास हुआ होगा तो जनता खुद वोट देगी लेकिन ऐसा नहीं है। चुनाव के समय भाजपा के लिए वही नेता रणनीतिकार का काम करेंगे जो अभी उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। जब पार्टी में कोई भी नेता लगातार उपेक्षित होगा तो फिर वो पार्टी के लिए योजनाएं कैसे बनाएगा यह भी एक बड़ा सवाल है।

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