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मध्य प्रदेश

जो 'छत छीन कर कंबल बांटे' वही राजनीति है बीजेपी में भी वही है जहां पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर सीनियरों को लगा रहे ठिकाने

मध्य प्रदेश भाजपा एक ऐसे ट्रैक पर चल पड़ी है जहां सत्ता के शिखर तक पहुंचे नेता को अपनी उम्र का ख्याल नहीं है लेकिन दूसरे नेता की उम्र बढ़ रही है उसका ...

• Oct 6, 2026• 3 min read
जो 'छत छीन कर कंबल बांटे' वही राजनीति है बीजेपी में भी वही है जहां पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर सीनियरों को लगा रहे ठिकाने

📷 Cover Photo: जो 'छत छीन कर कंबल बांटे' वही राजनीति है बीजेपी में भी वही ह

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मध्य प्रदेश भाजपा एक ऐसे ट्रैक पर चल पड़ी है जहां सत्ता के शिखर तक पहुंचे नेता को अपनी उम्र का ख्याल नहीं है लेकिन दूसरे नेता की उम्र बढ़ रही है उसका पूरा ध्यान रखा जाता है। दरअसल भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन के नाम पर कुछ नेताओं को लगातार ठिकाने लगाने का काम चल रहा है। जिन नेताओं के बल पर खुद सत्ता के शिखर तक पहुंचे उन्हीं नेताओं को कचरे का ढेर समझा जा रहा है। कुछ चुनाव हारे तो पार्टी ने उन्हें पूछना बंद कर दिया और कुछ चुनाव जीते तो उन्हे ये कह कर घर बैठा दिया गया कि युवाओं को आगे आने का मौका दीजिए। करीब दर्जन भर ऐसे नेता हैं जिनके बल पर भाजपा आज सत्ता के शिखर पर है और उन्हीं नेताओं को घर बैठा दिया गया है। बदलाव प्रकृति का नियम है लेकिन इस प्रकार का बदलाव जो पीढ़ी परिवर्तन कम व्यक्तिगत खुन्नस निकालना ज्यादा लग रहा है। सरकार फिर संगठन में जिस प्रकार से जातिवाद का बीज रोपित काया गया था वो आज पौधा बन कर तैयार हो चुका है। मोहन यादव के सीएम बनने के बाद 60+ नेताओं को जिस प्रकार से ठिकाने लगाया गया है वो किसी से छिपा नहीं है। जबकि खुद सीएम मोहन यादव 60+ हैं। मंच पर मयूर आसन करने से किसी की उम्र तो कम नहीं हो जाती। राजनीतिक द्वेष भी होते हैं लेकिन ऐसे द्वेष जो खुद का ही नहीं पूरी पार्टी का नुक़सान कर रहे हों उस प्रकार के द्वेष को हवा नहीं देनी चाहिए। समय का चक्र घूमता है कब किस नेता की किस्मत चमक जाए और कब कौन सा नेता अर्श से फर्श में आ जाए इस बात का कोई भरोसा नहीं है। इसी लिए राजनीति में बैलेंस बना कर चलने की परंपरा रही है। शिवराज सरकार में भी नेताओं के बीच राजनीतिक द्वेश चलते थे लेकिन उन्होंने खुल कर कभी किसी नेता का व्यक्तिगत नुकसान नहीं किया। जबकि उनसे बड़ा नेता मध्य प्रदेश की राजनीति में अब तक नहीं आया। एक देसी कहावत है कि 'छत छीन कर कंबल बांटे' वही राजनीति है। लेकिन यहां पर सिर्फ छत नहीं छीनी जा रही पूरी की पूरी जमीन पर ही कब्जा किया जा रहा है जिससे नेता आगे न पनपने पाएं।

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