मध्य प्रदेश
भाजपा में कुछ ऐसे 'पदाधिकारी' हैं जो सिर्फ नाम के हैं 'काम' के नहीं कार्यालय में भी दर्ज नहीं होती उपस्थिति
मध्य प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी और कार्यसमिति सब घोषित हो चुकी हैं। नियुक्त किए गए पदाधिकारियों ने काम भी शुरु कर दिया है
• Oct 10, 2026• Updated: Oct 10, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: भाजपा में कुछ ऐसे 'पदाधिकारी' हैं जो सिर्फ नाम के हैं 'काम'
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मध्य प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी और कार्यसमिति सब घोषित हो चुकी हैं। नियुक्त किए गए पदाधिकारियों ने काम भी शुरु कर दिया है। लेकिन प्रदेश कार्यकारिणी और कार्यसमिति में दर्जन भर ऐसे पदाधिकारी नियुक्त हुए हैं जिनके पास करने के लिए कोई काम नहीं है। नियुक्ति होने के बाद पहले तो गर्मजोशी के साथ पदाधिकारियों ने प्रदेश कार्यालय में अपनी औपचारिकताएं पूरी की लेकिन समय के साथ-साथ उनके मंसूबे भी धरे-के धरे रह गए। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फ्री-हैंड तो कर दिया गया है जिसकी बानगी भी देखने को मिल चुकी है। लेकिन ऐसे फ्री-हैंड किया गया है जिसमें अब भी चल सीएम साहब की ही रही है। जो पदाधिकारी सीएम से जुड़ा है उसे संगठन में काम मिल रहा है जो सीएम से नहीं जुड़ा है उसकी कोई पूछ परख नहीं है। एक पदाधिकारी अक्सर सीएम हाउस में ही रहता है और उसके बाद वो प्रदेश कार्यालय में समय देता है। अप्रत्यक्ष तरीके से संगठन में पूरी निगरानी वही रखता है और उसका काम ही संगठन की जानकारी सरकार को देना है। कुछ और छोटभइए पदाधिकारी हैं जो सरकार से मिले रहते हैं और उन्हें छोटे-मोटे काम मिलते रहते हैं। अध्यक्ष की हालत ऐसी है कि वो भीड़ में होकर भी तन्हा ही नजर आते हैं। प्रदेश कार्यालय में क्या चल रहा है उसका फीडबैक लगातार सीएम हाउस में दिया जाता है। हाल ही में नव नियुक्त संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर तिवारी और प्रदेश प्रभारी विप्लव देव को भी अपने पाले में लेने की प्रक्रिया चल पड़ी है। इस वक्त सत्ता और संगठन के बीच मौजूद विभीषण का एक ही काम है संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी का विश्वास जीतना। क्योंकि इन नेताओं का विश्वास जीता तो आगे का रास्ता सुगम बना रहेगा। मुखबिर को मिली खबर के मुताबिक छह नंबर में एक बड़ा इन्वेस्टमेंट किया गया है। अब सवाल इस बात का उठता है कि इतने बड़े इन्वेस्टमेंट के लिए धनराशि कहां से प्राप्त हो रही है। ऐसा भी नहीं है कि यह सारी जानकारी किसी को नहीं है लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि अपनी जुवां खोल दे। पीठ पीछे तो हर नेता और पदाधिकारी बोलने को तैयार हैं लेकिन सामने बोलने की उनकी हिम्मत नहीं क्योंकि मामला सीएम हाउस तक पहुंच जाएगा जिससे दिक्कतें भी खड़ी हो सकती हैं। मुखबिर की खबर पढ़ते रहिए अगले आलेख में स्क्रृय और निष्कृय पदाधिकारियों का नाम भी सार्वजनिक किया जाएगा।
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