मध्य प्रदेश
इंदौर में राहुल गांधी के सवालों पर 'बिलबिलाए' भाजपा नेताओं ने खुद से खोया आपा सोशल मीडिया में कार्यक्रम को बता रहे फ्लाप
19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंदौर दौरे पर सरकार से सवाल क्या कर दिया पूरी भाजपा में खलबली मच गई। भाजपा के जितने भी छोटभइया नेता हैं वो र...
• Sep 21, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: इंदौर में राहुल गांधी के सवालों पर 'बिलबिलाए' भाजपा नेताओं न
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19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंदौर दौरे पर सरकार से सवाल क्या कर दिया पूरी भाजपा में खलबली मच गई। भाजपा के जितने भी छोटभइया नेता हैं वो राहुल गांधी को अनाप- शनाप बकने में लग गए हैं। सोशल मीडिया में छोटभइया नेताओं के बयानों की बाढ़ सी आ गई है। वरिष्ठ नेताओं के तो राहुल गांधी के खिलाफ बयान देखने और सुनने को नहीं मिल रहे हैं लेकिन जो खुद को भाजपा का तथाकथित कार्यकर्ता अथवा पदाधिकारी बताते हैं वो सोशल मीडिया में राहुल गांधी के कार्यक्रम को फ्लाप बताने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस द्वारा आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आमंत्रित किया गया था। जिसमें युवा छात्र-छात्राओं का बड़ा जन सैलाब उमड़ा। राहुल गांधी ने कुछ छात्र- छात्राओं को मंच पर बुला कर सरकार के काम-काज की जानकारी ली जिसमें छात्र-छात्राओं ने राज्य सरकार के काम-काज से असंतोष जताया। कुछ मेडिकल छात्रों ने सरकार के प्रति काफी नाराजगी व्यक्त की। वीडियो जैसे ही रील के रुप में प्रसारित हुए भाजपा के सभी छोटभइया नेताओं के तन-बदन में आग लग गई। भाजपा के छोटभइयों ने राहुल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न सिर्फ उनके कार्यक्रम को फ्लाप बताने में जुट गए बल्कि जिन छात्र-छात्राओं ने मंच पर सरकार के विरोध में बोला उन्हें कांग्रेस का कार्यकर्ता घोषित करने में जुट गए हैं। भाजपा एक अनुशासित और कैडरबेस पार्टी कहलाती है। भाजपा के नेता कहते हैं कि अतिथि देवो भव। ऐसी स्थिति में अतिथि ने जब सत्य बोलने का प्रयास किया तो उस अतिथि का अपमान करना कौन सी संस्कृति है। भाजपा के नेता ये भी कहते हैं कि राहुल गांधी के आने से उनकी पार्टी को फायदा होता है। लिहाजा जब राहुल से फायदा होता है तो भाजपा को खुश होना चाहिए अथवा सोशल मीडिया में विरोध करना चाहिए। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं और देश अथवा प्रदेश में कुछ भी ग़लत हो रहा है तो उनकी तरफ से आवाज उठाना संवैधानिक है। भाजपा उस विरोध को राजनीतिक मान सकती है ये उसका अधिकार है लेकिन गलत को ग़लत कहना क्या ग़लत है। 17 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इंदौर आए तब किसी कांग्रेस नेता ने उनका विरोध नहीं किया लेकिन जब राहुल गांधी आए और सत्य बोलने और दिखाने का प्रयास किया तो पूरी भाजपा उनके पीछे पड़ गई।
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