मध्य प्रदेश
डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा का व्यक्तिगत नुकसान कराने के चक्कर में भाजपा ने प्रदेश के सभी ब्राह्मणों का विश्वास खो दिया
मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन और सरकार के बीच क्या चल रहा है यह बात अब किसी से छुपी नहीं है। पर्दे के पीछे की सारी बातें पर्दे के बाहर आ चुकी हैं
• Sep 26, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा का व्यक्तिगत नुकसान कराने के चक्कर में
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मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन और सरकार के बीच क्या चल रहा है यह बात अब किसी से छुपी नहीं है। पर्दे के पीछे की सारी बातें पर्दे के बाहर आ चुकी हैं। दरअसल इस विवाद की शुरुआत दतिया विधानसभा के उप चुनाव से हुई थी जब ऐन मौके पर पूर्व गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर भाजपा ने दूसरे ब्राह्मण आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। भाजपा के इस फैसले को न सिर्फ दतिया की जनता ने सिरे से नकार दिया बल्कि प्रदेश के 55 जिलों में रह रहे पूरे ब्राह्मण समाज का भाजपा से मोह भंग हो गया। दरअसल डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा भाजपा के इक लौते ऐसे नेता हैं जिन्हें प्रदेश के प्रत्येक जिले में रहने वाला ब्राह्मण वर्ग अपना नेता मानता है। टिकट कटने के बाद जब पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पहली बार सीएम और आशुतोष तिवारी के साथ मंच साझा कि तो उनका गला भर आया और आंखों से आंसू छलक पड़े। उन आंसुओं के छीटे प्रदेश के प्रत्येक ब्राह्मण के दिल में गिरा जो अब तक सूखा नहीं है। वैसे भाजपा में ब्राह्मण नेताओं की कमी नहीं है। राजेन्द्र शुक्ल,गोपाल भार्गव,राकेश शुक्ल सहित अनेक ब्राह्मण नेता हैं लेकिन ब्राह्मणों के बीच स्वीकार्यता सिर्फ डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा की है। पूर्व गृह मंत्री का टिकट काटने के बाद सीएम को लगा कि उन्होंने अपने रास्ते के कांटे को निकाल दिया है। लेकिन हकीकत यह है कि उन्होंने अपने रास्ते का कांटा तो निकाल दिया लेकिन पूरी भाजपा के रास्ते में कांटों का अंबार लगा दिया। इस बात में कोई सक नहीं कि ब्राह्मण वर्ग के अलावा सवर्णों में आने वाला प्रत्येक समाज पिछले कुछ सालों से भाजपा में ही भरोसा करता आया है जिसका नतीजा यह निकला कि सत्ता के शिखर पर भाजपा लगातार पहुंचती रही। लेकिन पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जब से ओबीसी वर्ग को हथियार बनाया तो वह हथियार धीरे-धीरे ब्रह्मास्त्र के रुप में तब्दील हो गया। डॉक्टर मोहन यादव का राज आया तो उन्होंने सभी ब्राह्मण नेताओं को एक-एक करके ठिकाने लगाने का काम शुरु कर दिया। जिन ब्राह्मण नेताओं ने उनके सामने घुटने टेक दिए और मौन हो गए वो सरकार में बने हैं बांकी जिन्होंने घुटने नहीं टेके उन्हें ठिकाने लगाने का सिलसिला चल पड़ा। सवाल इस बात का उठता है कि जिस भाजपा का कोर वोटर सवर्ण वर्ग रहा है उसी सवर्ण को नकार कर भाजपा ओबीसी की नैया का सहारा ले रही है। ये वही वर्ग है जो हर पांच साल में अपना मन और मूड बदल देता है। लेकिन सवर्ण स्थाई रुप से भाजपा में जुड़ा है तो भाजपा के नेतृत्व को सवर्ण हजम नहीं हो पा रहे। जिस प्रकार से नरोत्तम मिश्रा को पहले चुनावी मैदान से बाहर रखा गया उसके बाद उनको पार्टी से भी कुछ तथाकथित नेताओं ने निकलवाने का प्रयास किया जिसमें वो कामयाब नहीं हुए ये सारी बातें और षड़यंत्र अब प्रदेश का प्रत्येक ब्राह्मण और सवर्ण वर्ग जान चुका है। लिहाजा मिशन 2028 के पथ पर चल रही भाजपा के रास्ते पर साजिशों की जो बिसात बिछाई गई है उससे भाजपा समय रहते पार नहीं पाती है तो आने वाला समय उसके लिए घातक साबित हो सकता है।
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