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मध्य प्रदेश

कैलाश और अमित शाह की जुगलबंदी से कई नेताओं के 'कलेजे' पर रेंगे 'सांप' आंखों ही आंखों में कह दी सारी बात

मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वर्तमान सरकार में उपेक्षा का शिकार जरुर हो रहे हैं लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व की नजर में उनका स्थान अ...

• Oct 4, 2026• Updated: Oct 4, 2026• 3 min read
कैलाश और अमित शाह की जुगलबंदी से कई नेताओं के 'कलेजे' पर रेंगे 'सांप' आंखों ही आंखों में कह दी सारी बात

📷 Cover Photo: कैलाश और अमित शाह की जुगलबंदी से कई नेताओं के 'कलेजे' पर रें

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मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वर्तमान सरकार में उपेक्षा का शिकार जरुर हो रहे हैं लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व की नजर में उनका स्थान अलग ही है। पिछले महीने इंदौर दौरे पर आए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें अपना अविभावक कह कर संबोधित किया था। उसके बाद प्रदेश प्रभारी विप्लव देव जब पहली बार भोपाल आए तो कैलाश विजयवर्गीय को पूरे जोश के साथ गले लगाया। इन सब नेताओं से अलग केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब भोपाल दौरे पर आए तो एक अलग ही नजारा देखने को मिला। जहां पर अन्य नेताओं की अमित शाह से नजर मिलाने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी वहीं कैलाश विजयवर्गीय ने अमित शाह का हाथ अपने हाथ में थामा और एक अलग ही अंदाज में उनसे दोनों नेताओं ने एक दूसरे से नजर मिलाई ऐसा लगा जैसे दोनों नेता आपस में नजरों ही नज़रों में प्रदेश की राजनीति में बातें कर रहे हों। इस बात में कोई सक नहीं कि कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के बड़े नेता हैं। और मालवा अंचल की राजनीति में भाजपा के तुरुप के इक्के माने जाते हैं। वर्तमान परिस्थिति में वो फिट नहीं बैठ रहे होंगे लेकिन पार्टी में उनकी स्वीकार्यता कम नहीं हुई है। दिल्ली के नेता हों अथवा एमपी के नेता कैलाश विजयवर्गीय के सामने सभी का सम्मान से सिर झुक जाता है। अगर ऐसा नहीं होता तो घंटा जैसे शब्द का इस्तेमाल करने वाला कोई अन्य नेता होता तो भाजपा अब तक उसकी राजनीति को ठिकाने लगा चुकी होती लेकिन कैलाश विजयवर्गीय के साथ ऐसा नहीं हुआ। कैलाश आज भी शिखर पर हैं। कैलाश का समय खराब चल रहा है इसका मतलब ये नहीं कि वो पार्टी के लिए खत्म हो चुके हैं। मालवा अंचल से आने वाले कैलाश विजयवर्गीय का समय कब आ जाए इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। बांकी तस्वीर यह बताने के लिए पर्याप्त है कि कैलाश विजयवर्गीय पार्टी में और नेताओं के बीच कितनी अहमियत रखते हैं। जिस वक्त अमित शाह भोपाल से विदा हो रहे थे उस वक्त कई नेता वहां पर मौजूद थे सभी ने केन्द्रीय गृह मंत्री को पूरी गर्मजोशी के साथ विदा किया लेकिन जो अंदाज कैलाश विजयवर्गीय का था उससे की नेताओं के 'कलेजे पर सांप' रेंग रहे थे।

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