मध्य प्रदेश
भाजपा के कोर ग्रुप पर सीएम की 'कैंची' पहले कुछ वरिष्ठ नेताओं को बुलाया नहीं फिर कहा नेता उपलब्ध नहीं थे
मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों एक अलग ही माहौल चल रहा है। जहां संगठन के फैसलों पर भी सीएम मोहन यादव अपनी खूब चला रहे हैं
• Oct 5, 2026• 3 min read

📷 Cover Photo: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम छूटने
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मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों एक अलग ही माहौल चल रहा है। जहां संगठन के फैसलों पर भी सीएम मोहन यादव अपनी खूब चला रहे हैं। हांलांकि अध्यक्ष और सीएम के बीच आए मतभेद की खबरों के बीच केन्द्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष को फ्री-हैंड कर दिया है लेकिन गाहे-बगाहे संगठन में अब भी सीएम की ही मर्जी चल रही है। दरअसल पिछले हफ्ते बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कई वरिष्ठ नेता मौजूद नहीं थे। प्रदेश प्रभारी विप्लव देव से जब पूछा गया तो उन्होंने बड़ी सफाई से जवाब देते हुए कहा कि वरिष्ठों से संपर्क किया गया था लेकिन वो शहर में मौजूद नहीं थे जिसके कारण कोर-ग्रुप की बैठक में शामिल नहीं हुए। जिन नेताओं की उपस्थिति पर कैंची चलाई गई उनमें पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा,भूपेन्द्र सिंह और गोपाल भार्गव जैसे नेता शामिल हैं। ये भाजपा के उन नेताओं में हैं जिन्हें पार्टी की 'रीढ़' माना जाता था। लेकिन सत्ता और संगठन में नेतृत्व बदलते ही वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में जिस प्रकार से कैंची चलाई गई वो पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रही है। पार्टी में मौजूद मुखबिरों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने की बात करते हैं और कोर ग्रुप में जब आमंत्रित करने की बात आई तब भी बीजेपी अध्यक्ष ने वरिष्ठ नेताओं के नाम को लिस्ट में शामिल किया था। लेकिन जब सूची सीएम हाउस पहुंची तो वहां से कैंची चला दी गई। सीएम ने जैसे ही तीन नामों को काटा तो प्रदेश अध्यक्ष ने शांत रहने में ही भलाई समझी। लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या भाजपा में अब वरिष्ठ नेताओं के भविष्य पर ग्रहण लगाने की तैयारी है। यहां पर सवाल सीएम मोहन यादव से भी है कि जिन वरिष्ठ नेताओं को वो साइड लाइन कर रहे हैं उन्हीं नेताओं ने कभी उनके भविष्य को संवारने का काम किया था। और आज वो सीएम हैं तो उन्हीं नेताओं को चुन-चुन कर साइड लाइन करने का काम कर रहे हैं। सीएम के इस रवैए को अब पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी समझने लगे हैं लेकिन बात यहां पावर की है। जिसके हाथ में पावर है उसके सामने झुके रहने में ही भलाई है जो पार्टी के कार्यकर्ता कर रहे हैं।
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