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मध्य प्रदेश

बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के 'फ्रंट फुट' पर आते ही 'बैक फुट' हुए 'विभीषण'

मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक सहज और सरल व्यक्तित्व के नेता हैं। वो अक्सर अपनी योजनाओं को धरातल में उतारने के लिए जाने जाते हैं न कि ...

• Sep 28, 2026• 3 min read
बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के 'फ्रंट फुट' पर आते ही 'बैक फुट' हुए 'विभीषण'

📷 Cover Photo: बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के 'फ्रंट फुट' पर आते ही 'बैक

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मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक सहज और सरल व्यक्तित्व के नेता हैं। वो अक्सर अपनी योजनाओं को धरातल में उतारने के लिए जाने जाते हैं न कि लाइमलाइट में रहना पसंद करते हैं। उनकी उसी सरलता का लाभ पार्टी में करीब एक साल तक उठाया गया। सीएम हाउस से लेकर प्रदेश कार्यालय तक 'विभीषण' ने एकाधिकार कर लिया। सीएम हाउस में अक्सर घुसे रहना और इधर-उधर की बात कर पार्टी का माहौल खराब करना विभीषण का एक ही काम था। प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस दौरान शांति बनाए रखी लेकिन पानी सिर से ऊपर आता देख प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपनी पर आ गए। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक खूबी है कि उन्हें पद का कोई लालच नहीं है लिहाजा पद छोड़ने के लिए वो बहुत ज्यादा सोच विचार नहीं करते। ऐसी स्थिति में प्रदेश अध्यक्ष जैसे ही फ्रंट फुट पर आए तो विभीषण का काम करने वाला नेता खुद बैक फुट पर खिसक गया। खबर के साथ दिख रही तस्वीर रविवार की है जब सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल प्रेसवार्ता करने के बाद प्रदेश अध्यक्ष के चेंबर पर बैठे। इस दौरान नव नियुक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया और उनकी टीम के कुछ साथी भी मौजूद थे। एक सामान्य वातावरण के बीच हंसी ठहाकों का माहौल चलता रहा। करीब 15 मिनट तक नेताओं ने आपस में बातें की। लेकिन यहां पर विभीषण की नो इंट्री थी। यह दर्शाता है कि अब प्रदेश अध्यक्ष और उनकी टीम पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ चुकी है। पार्टी के अंदर जो विवाद और अस्थिरता की स्थितियां निर्मित हो रहीं थीं वो अब करीब-करीब खत्म हो चुकी हैं। हांलांकि विभीषण का अभी तक पूरा इलाज नहीं हो पाया है लेकिन विभीषण की पहचान कर संगठन ने उसको साइड जरुर कर दिया है। बीजेपी अध्यक्ष ने फिलहाल प्रदेश कार्यालय के माहौल को तो ठीक कर दिया है लेकिन पार्टी के अंदर अब भी विद्रोह की आग जल रही है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में जिस प्रकार से भाजपा नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है उसे खत्म करना फिलहाल दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। क्योंकि अब जिन नेताओं में विवाद है वो कोई छोटे-मोटे नेता नहीं पार्टी के बड़े नेता हैं जो अपने क्षेत्रों में पार्टी का चेहरा माने जाते हैं।

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