हेमंत के एक बाउंसर से 'हिट विकेट' हुए सारे कांग्रेसी, MUKHBIR ने नौ जून को लिखा था खंडेलवाल को समझ नहीं पाए कांग्रेसी
मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बेहद ही शांत स्वभाव वाले नेता हैं। उनकी राजनीतिक समझ और रणनीतिक कौशल इतना मजबूत है कि वो अपनी रणनीति को बड़े सहज तरीके से धरातल में उतारते हैं जिसका असर बाद में दिखता है। राज्यसभा का नामांकन होने के बाद ही मुखबिर ने अपने लेख में लिखा था कि भाजपा अध्यक्ष कांग्रेस को छिन्न-भिन्न कर देंगे क्योंकि उनकी रणनीति को कांग्रेस नेता समझ ही नहीं पाए। जिस दिन भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाया था तो यह खबरें चल रही थी कि भाजपा ने कांग्रेस में खलबली मचाने के लिए महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन ऐसा नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष ऐसी गोटियां नहीं खेलते हैं जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़े। आखिर में मुखबिर द्वारा बीजेपी अध्यक्ष पर लिखी खबर पर मुहर लगी। जब मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ। हांलांकि एक लिहाजा से कांग्रेस के लिए अच्छा भी हुआ क्योंकि वोटिंग होती तो कांग्रेस की ज्यादा दुर्दशा होती। करीब बीस विधायक भाजपा के संपर्क में थे जबकि जीतने के लिए सिर्फ नौ वोटों की जरुरत थी। ये वही हेमंत खंडेलवाल हैं जिनकी कुशल रणनीति ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी 29 की 29 लोकसभा सीट जीत कर पहली बार क्लीन स्वीप किया था और उसी सफल रणनीति का इनाम हेमंत खंडेलवाल को अध्यक्ष बना कर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने दिया है। भाजपा अध्यक्ष एक साइलेंट 'किलर' के रुप में काम करते हैं।उनकी रणनीति को समझना उनकी पार्टी के नेताओं के बस में भी नहीं है। जिस प्रकार से भाजपा अध्यक्ष ने राज्यसभा चुनाव में अपनी दक्षता साबित की है उससे यह स्पष्ट है कि भाजपा आने वाले समय में कांग्रेस को चारों खाने चित्त करने के लिए तैयार है। बीजेपी अध्यक्ष जिस प्रकार से खुद काम करते हैं ठीक उसी प्रकार से वो अपनी टीम से भी काम लेते हैं। कब कौन सा दांव खेलना है उसकी जानकारी पदाधिकारी को ऐन मौके पर ही होती है। और यही वजह बीजेपी अध्यक्ष को औरों से अलग बनाती है। क्योंकि वो तब तक अपने पत्ते नहीं खोलते जब तक उन्हें ये विश्वास नहीं हो जाता कि उनका यह दांव सफल होगा। इसी लिए राज्यसभा की वो सीट भाजपा जीतने में कामयाब हुई है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल थी। कांग्रेस के पास चार अतिरिक्त विधायक होते हुए भी उसे अपने विधायकों की बाड़ेबंदी करनी पड़ी। इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। जिस प्रकार से बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल ने यह जीत दर्ज की है वो अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत कही जा सकती है। भाजपा की इस जीत से कांग्रेस के सारे धागे खुल गए,कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर गया और पार्टी की एकजुटता की पोल खुल गई। बीजेपी अध्यक्ष ने एक तीर से कई निशाने लगाए और सभी निशाने इतने सटीक बैठे जिसका दर्द साल 2027 और 28 तक बना रहेगा।
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