एमपी में तेजी से बढ़ रही कुंवारे लड़कों की संख्या,लड़कों के माता-पिता शादी ढूंढ कर हो रहे परेशान
विकास की गति में एमपी जितनी तेजी से बढ़ रहा है उतनी ही गति से एमपी में कुंवारे लड़कों की संख्या बढ़ रही है। कुंवारे लड़कों की शादी के मामलों में शहर और गांव की स्थिति करीब एक जैसी ही है। आज के दौर में लड़की वालों के पास ऑप्शन की कमी नहीं लेकिन लड़के वालों के पास ऑप्शन ही नहीं है। लड़कों की समस्या ये है कि उनके घर पर जब शादी के लिए लड़की वाले आते हैं तो ये पूछा जाता है कि लड़का कौन सी नौकरी करता है कितना कमाता है। अगर लड़का नौकरी नहीं कर रहा होता है तो शादी वाले उल्टे पांव लौट जाते है। लड़का अगर नौकरी कर रहा है और वो नौकरी प्राइवेट सेक्टर में है तब भी शादी वाले रुचि नहीं लेते हैं क्योकि उन्हे प्राइवेट नौकरी पर आज भी विश्वास नहीं है। सीएम मोहन यादव प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार निवेश लाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे युवाओं को निजी सेक्टरों में नौकरी मिल पाए लेकिन लड़की के माता पिता का विश्वास निजी सेक्टर में काम करने वाले युवाओं पर है ही नहीं। शासकीय नौकरी में लड़का छोटे पद पर और कम वेतन में नौकरी कर रहा है तब भी उस पर लड़की के माता पिता विश्वास करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में सरकार कृषि को बढ़ा देने की बात करती है। युवाओं को कृषि के क्षेत्र में आगे आने के लिए सरकार लगातार प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन किसान पुत्रों के साथ कोई अपनी लड़की का विवाह नहीं करना चाहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुवारे लड़कों की संख्या इस गति से बढ़ रही है जिसका अंदाजा भी लगाना मुस्किल है। दरअसल लड़की के माता पिता की ये सोच है कि लड़का भले कम वेतन पाए लेकिन वो शहर में रहता हो। हर लड़की का पिता अपनी बेटी को शहर में रखना चाहता है। इसलिए वो गांव नहीं शहर में नौकरी करने वाले लड़के को लड़की व्याहना पसंद करते है। इन सब बातों के अलावा एक और बात देखने को मिल रही है। कुवारे लड़कों की स्थिति का आंकलन मैरिज व्यूरो में हुए रजिस्ट्रेशन से लगाया जा सकता है जहां कुवारे लड़कों की संख्या ज्यादा है जबकि लड़की वालों की संख्या बेहद कम है। प्रदेश में कुंवारे लड़कों की बढ़ती संख्या अब एक समस्या का सबब बनता जा रहा है जिसके लिए राज्य सरकार को जन जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
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