खिलाड़ियों को दो साल से नहीं मिला किट और खुरागी भत्ता,सिर्फ इवेंट तक सीमित हैं खेल खतिविधियां
भोपाल के टीटी नगर स्थित तत्याटोपे स्टेडियम के तहत पांच खेल अकादमी आती हैं। हजारों की संख्या में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने का काम चलता है लेकिन वो प्रशिक्षण अब सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। क्योंकि स्टेडियम के तहत संचालित होने वाली अकादमियों के बच्चों को किसी प्रकार से कोचिंग नहीं मिलने के कारण अब वो हताश और निराश होने लगे हैं। सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी छोड़ चुके हैं। कुछ बच्चे कोचिंग नहीं मिलने के कारण निजी कोचिंग सेंटरों में जाने लगे हैं। स्टेडियम की सबसे बड़ी समस्या ये है कि पिछले दो साल से स्टेडियम के खिलाड़ियों कोई खेल किट नहीं मिला है। इतना ही नहीं स्टेडियम में खेलने वाले बच्चों को खुरागी भत्ता भी दिया जाता था जो पिछले दो साल से नहीं दिया गया। स्टेडियम के स्टाफ से इस विषय पर बात करो तो वो कुछ दिनों में मिलने का कह कर बातें टालने का प्रयास करते हैं। स्टेडियम में जो बच्चे खेलने आते हैं उनके परिजन सीधे बात नहीं करते लेकिन यह बात जरुर करते हैं कि बच्चों के लिए किट नहीं है लेकिन स्टेडियम में आने वाले सारे स्टाफ के लिए दर्जनों की संख्या में किट आ रहे हैं यहां तक कि उन स्टाफों के बच्चे भी स्टेडियम का किट पहन कर घूमते नजर आते हैं। डे-बोर्डिंग टेनिस की हालत तो इतनी बदतर हो चुकी है कि उसकी अकादमी तो है लेकिन न कोच और न ही बच्चे। इसी तरह के हालात अन्य अकादमियों के भी हैं। स्टेडियम के नाम को बनाए रखने के लिए कुछ ऐसे इवेंट ऑर्गनाइज किए जाते हैं जिससे प्रतिष्ठा बनी रहे। किसी दूसरी अकादमी के बच्चे खेल में प्रदेश का नाम रौशन करते हैं तो उन्हे तत्याटोपे स्टेडियम का बता कर बड़ा इवेंट किया जाता है। करीब दो साल पहले जब विश्वास सारग को खेल मंत्री बनाया गया था तब लगा था कि अब खेलों के साथ न्याय होगा लेकिन यहां तो न्याय होने के बजाय पूरी तरह से ही खेल व्यवस्था चौपट हो गई। अब खेल और खिलाड़ी खुद को लाबारिश सा महसूस करने लगे हैं।
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