पेशाबकांड के बाद केदारनाथ शुक्ला की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नेड्डा से किस नेता ने नहीं होने दी बातःपढ़िए मुखबिर
सीधी में हुए पेशाबकांड के बाद भाजपा के पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक कैरियर करीब-करीब खत्म हो गया। कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने वाले केदारनाथ शुक्ला को भाजपा ने पार्टी से ऐसे बाहर निकाल कर फेंक दिया जैसे दूध में पड़ी कोई मक्खी। भाजपा के पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ल आज भी इस बात से हैरान और परेशान हैं कि आखिर पार्टी के नेताओं ने उनके साथ ऐसे कुचक्र क्यों चला। अपनी बेवाकी के लिए मशहूर केदारनाथ शुक्ला ने एक इंटरव्यू में कई बातों का खुलासा किया है जिसमें उनका दर्द भी झलका। पूर्व विधायक ने कहा कि सीधी में अर्थ प्रधान राजनीति होती है। आज जो विधायक हैं वो पहले से ही उनकी जगह लेने का प्रयास कर रहीं थी इसी लिए उनके खिलाफ इतना बड़ा कुचक्र चला गया। केदारनाथ शुक्ला ने एक बड़े नेता का नाम न लेते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जब राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा रीवा आए थे तो उन्होने बात कराने के लिए कहा था लेकिन उस नेता ने उनकी बात राष्ट्रीय अध्यक्ष से नहीं कराई। दरअसल जिस नेता का केदारनाथ शुक्ल ने नाम नहीं लिया वो प्रभावशाली नेता कोई और नहीं बल्कि राजेन्द्र शुक्ल हैं जो विंध्य की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़े चेहरे के रुप में जाने जाते हैं। विंध्य में उनके बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता। ये बात और है कि उनके समर्थन में रीवा के अन्य छह विधायक ही नहीं बल्कि विंध्य का कोई भी विधायक पक्ष में नहीं है फिर भी भाजपा नेताओं की नजर में वही सबसे बड़े चेहरे हैं। केदारनाथ शुक्ला ने कहा कि उनकी राजनीति खत्म करने के लिए सुनियोजित तरीके से षड़यंत्र रचा गया था। पेशाबकांड के मामले में पार्टी की तरफ से जांच कराई गई थी जिसमें वो निर्दोश साबित हुए थे उसके बाद भी उन्हे साइडलाइन किया गया। भाजपा के पूर्व विधायक ने सीधी सासंद का खुल कर नाम लिया और कहा कि उन्होने पूरे षड़यंत्र को अंजाम दिया था। लेकिन पार्टी ने सारा ठीकरा बगैर कुछ किए भी उन पर फोड़ दिया। गौरतलब है कि केदारनाथ भाजपा के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो खुल कर अपनी बात रखते हैं। साल 2018 में जब भाजपा की सरकार नहीं बनी थी तब पार्टी के अध्यक्ष राकेश सिंह थे उस दौरान केदारनाथ शुक्ल ने खुल कर कहा था कि प्रदेश अध्यक्ष को नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके इसी बयान के बाद उनकी राजनीति में राहुकाल आया। सीनियर नेता होने के बाद भी ना मंत्री बनने दिया गया। बल्कि विधानसभा अध्यक्ष पद की दौड़ में वो सबसे आगे थे उसके बाद भी उन्हे विधानसभा अध्यक्ष नहीं बनने दिया गया। साल 2023 आते-आते उनकी राजनीति को ही खत्म करने की जमीन तैयार कर ली गई जिसमें सफलता भी मिली। केदारनाथ शुक्ल इस वक्त घर पर बैठे हैं और वर्तमान की राजनीति को काफी बारीकी से देख रहे हैं। इसके बाद वो मिशन 28 की तैयारी पर फैसला करेंगे।
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