'शिव'सुरेश संघ मोहन' ने लिखी दतिया उप चुनाव की पटकथा 'कैलाश' को मालूम थी कुचक्र की कहानी
दतिया विधानसभा उप चुनाव जिस प्रकार से अप्रत्याशित रुप से आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान भाजपा ने उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया वो किसी के गले नहीं उतर रहा है। दरअसल पूर्व गृह मंत्री का यहां से टिकट फायनल माना जा रहा था। उनकी तैयारी भी पूरे शबाब पर थी लेकिन ऐन मौके पर आशुतोष का नाम आने से पूरे सियासी समीकरण बदल गए। स्थिति यहां तक निर्मित हुई कि बगैर किसी घोषणा के बीजेपी मीडिया विभाग की टीम 'मौन सत्याग्रह' पर चली गई। क्योंकि अभी तक पार्टी ने कोई लाइन ही तय नहीं किया है कि इस मामले में बोलना क्या है।
कैसे बदला सियासी घटनाक्रम
टिकट फायनल होने से ठीक एक दो दिन पहले सीएम मोहन यादव दिल्ली जाते हैं जहां पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव की बंद कमरे में मीटिंग होती है। उसके बाद ही सीएम के चेहरे के हावभाव बदलते हैं। इसके बाद सीएम की सुरेश सोनी से मुलाकात होती है जहां दतिया में दूसरा उम्मीदवार उतारने पर चर्चा होती है। ऐसी स्थिति में सीएम मोहन यादव और सुरेश सोनी के बीच दूसरे उम्मीदवार को लेकर सहमति बनती है।
कैलाश विजयवर्गीय को मालूम थी कहानी
इस पूरे घटनाक्रम की कहानी भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय को पहले से मालूम थी। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि कोई भी उम्मीदवार हो सकता है लेकिन किसी ने उनके बयान के गंभीरता को नहीं समझा। कैलाश विजयवर्गीय भी इस पूरे मामले में खुलना नहीं चाहते थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि एक और बड़ा नेता आने से आगे चल कर उन्हें ही दिक्कत होगी लिहाजा उन्होंने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी। और आखिरकार भाजपा की तरफ से एक नया नाम सुझाया गया जो आशुतोष तिवारी का था। फिलहाल अब भाजपा पूर्व गृह मंत्री को पीछे छोड़ कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है लेकिन उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आशुतोष तिवारी को जीत कैसे दिलाई जाए। क्योंकि दतिया जिले के सभी पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसी लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भोपाल बुलाया गया है जिससे डैमेज कंट्रोल किया जा सके।
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