पीतांबरा के दरबार में गिरेंगे 'आँसू' बरसेंगे 'घन' श्याम
दतिया उप चुनाव अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है। चुनाव प्रचार थमने के बाद घर-घर जनसंपर्क का दौर जारी है। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से सभी मंत्रियों को मैदानी जमावट के लिए उतार दिया गया है। तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी अपने अनुभवी नेताओं को दतिया उपचुनाव में उतार दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का चुनाव बना लिया है क्योंकि यह सीट कांग्रेस के कोटे में राजेन्द्र भारती के पास चली गई थी। भाजपा ने यहां से पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर आशुतोष तिवारी को चुनाव मैदान में उतार दिया है। जबकि इस सीट पर 2008 से डाक्टर नरोत्तम मिश्रा लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। यहां पर भाजपा को सबसे बड़ी लड़ाई अपने ही कार्यकर्ताओं से लड़नी है। दरअसल जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री का भाजपा नेतृत्व ने टिकट काटा उससे भाजपा के कार्यकर्ता काफी नाराज़ हैं। यही कारण है कि भाजपा के नेतृत्व ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का चुनाव बना लिया है। सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए दतिया उप चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके हैं। मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में भाजपा पहले ही विजयपुर का उप चुनाव हार चुकी है। ऐसी स्थिति में भाजपा अगर दतिया उप चुनाव भी हारती है तो प्रदेश नेतृत्व की चुनावी नीतियों पर और प्रत्याशी चयन पर सवाल खड़े होने लगेंगे। इसी लिए भाजपा ने अपने सारे वरिष्ठ नेताओं को चुनाव मैदान में उतार दिया है। भाजपा के लिए यह चुनाव इस लिए भी ज्यादा कठिन है क्योंकि भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी पर बाहरी होने का ठप्पा लगा हुआ है। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार दतिया राजघराने से आते हैं दो बार पहले भी विधायक रह चुके हैं। और साफ स्वच्छ छवि वाले नेता हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।
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