सावन की फुरफुरी के बीच बीजेपी नेताओं की आपसी बैठक सियासत में तलाश रही नए समीकरण
दतिया विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं में एक अलग प्रकार की बेचैनी का आलम देखने को मिल रहा है। पहले दिल्ली में मोदी और अमित शाह ने एमपी के कई नेताओं की परेड लगाई और अब वही नेता भोपाल में एक दूसरे के घर पर बैठक कर सियासत के नए ताने बाने को बुनने का प्रयास कर रहे हैं। इन बैठकों को देख कर ऐसा लग रहा है जैसा मानो एक दूसरे से यह पूछने का प्रयास हो रहा है कि आप से क्या पूछा गया है। दिल्ली में हुई मुलाकात की बात कोई नेता एक दूसरे को तो नहीं बता रहा है लेकिन दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से हुई चर्चा की घबराहट जरुर एमपी बीजेपी के नेताओं में साफ दिख रही है। 15 अगस्त की बात रही हो अथवा 16 अगस्त की दोनों दिन मध्य प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का एक दूसरे से मेल मुलाकात का दौर चलता रहा। खास बात यह है कि कोई भी नेता इतना फ्री तो नहीं बैठा है कि दूसरे नेता के घर चाय पीने अथवा नास्ता करने गया होगा। नेता जब एक दूसरे के साथ बैठते हैं तो बात राजनीति की होती है। और इस वक्त एमपी बीजेपी के नेता कुछ ऐसे ही राजनीतिक समीकरण से जूझ रहे हैं जो दिखाई तो नहीं पड़ रहा है लेकिन उसकी आहट जरुर महसूस हो रही है। भाजपा के प्रति जनता का बदलता रुझान भाजपा नेताओं से छिपा नहीं है। खास कर सवर्ण वर्ग जिस प्रकार से भाजपा से अलग होने की कगार है उससे भाजपा के खेमे में बेचैनी का आलम दिख रहा है। भाजपा के नेता ओबीसी का मोह छोड़ना नहीं चाहते और सवर्ण के साथ खुद कर आना नहीं चाहते। यही ऊहापोह भाजपा नेताओं को परेशान कर रही है। रविवार को भाजपा नेता एक दूसरे से लगातार मिलते रहे। पहले तोमर और शिवराज फिर शिवराज और हेमंत खंडेलवाल इस प्रकार से एक दूसरे नेता आपस में मेल मिलाप करते रहे। यह मेल मिलाप कोई सामान्य नहीं दिख रहे। आने वाले तूफान से पहले की शांति दिख रहे यह मेल मिलाप कुछ बदलाव के भी संकेत दे रहे हैं जिसकी भूमिका को लिखने का तेजी से काम चल रहा है।
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