भाजपा के 'मायाजाल' में फंसी राज्यसभा की तीसरी सीट कांग्रेस में टेंशन भाजपा में उत्साह
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहे चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भाजपा के दोनों उम्मीदवारों रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। वहीं कांग्रेस की तरफ से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गया है। आंकड़ों के हिसाब से भाजपा के खाते में दो सीट और कांग्रेस के खाते में एक सीट आ रही है। दो सीटों के बाद भाजपा के पास 49 विधायक अतिरिक्त हैं मतलब भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए नौ विधायकों को इधर से उधर करना है। जिस प्रकार से भाजपा ने मायाजाल रचा है उसमें फिलहाल कांग्रेस फंसी हुई नजर आ रही है। सीएम मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय के बयानों पर गौर फरमाएं तो यह नजर आता है कि भाजपा की तीसरी सीट पर नजर है। हांलांकि भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार की घोषणा अब तक नहीं की है। कांग्रेस इस पसोपेश में है कि भाजपा क्या करना चाहती है। कांग्रेस ने तीसरी सीट को प्रतिष्ठा से जोड़ दिया है। और अगर कहीं भाजपा तीसरी सीट पर हाथ साफ करती है तो उमंग सिंघार और जीतू पटवारी की बहुत बड़ी रणनीतिक हार मानी जाएगी। कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता और विधायक शनिवार को भाजपा के बनाए मायाजाल को तोड़ने का प्रयास करते रहे अंत में यही निर्णय निकला कि भाजपा को अपने पत्ते खोलने दो। साथ ही सभी विधायकों को व्हिप जारी कर साफ़ कहा गया है कि किसी भी स्थिति में अगर वोटिंग की स्थिति बनती है तो सभी विधायकों को मौजूद रहना होगा। अब सारा फैसला आठ जून मतलब सोमवार पर टिका है। क्योंकि भाजपा कभी भी बाजी पलटने का माद्दा रखती है। लिहाजा भाजपा के बनाए मायाजाल को तोड़ने में कांग्रेस अब तक नाकाम साबित हुई है। यहां मजे की बात यह भी है कि भाजपा मानसिक रुप से कांग्रेस नेताओं पर दबाव बनाने में कामयाब हुई है। क्योंकि विपक्ष को ताकत के बजाय मानसिक रुप से तोड़ना भी एक बड़ी सफलता मानी जाती है। अब भाजपा की रणनीति समझने के लिए कांग्रेस नेताओं के पास इंतजार करने और विधायकों में एक जुटता बनाए रखने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
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