कांग्रेस में जिन्हें खुद 'लीड' करने का मौका नहीं मिला वो 'लीडिंग' चैनल ढूंढते हैं ऐसे आदमी किस तरह बनेंगे 'नायक'
राष्ट्रीय कांग्रेस की बात हो अथवा मध्य प्रदेश कांग्रेस की बात हो नेताओं का एक बयान अक्सर सुनने को मिलता है कि आप दिखाओगे तो है नहीं। लेकिन हकीकत इसके ठीक विपरीत है। दरअसल कांग्रेस में इन दिनों माथा देख कर टीका लगाने की परंपरा शुरु हो गई है। मामला राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है। कांग्रेस नेतृत्व के द्वारा मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया गया है। उम्मीदवार बनने के बाद पहली बार प्रदेश कार्यालय आई मीनाक्षी नटराजन का इंटरव्यू कवर करने के लिए कुछ मीडिया कर्मियों ने प्रयास किया। लेकिन मीडिया कर्मियों को मीनाक्षी नटराजन का इंटरव्यू करने से रोक दिया गया। और इंटरव्यू न करने के लिए जो वजह बताई गई वो हैरान करने वाली है। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि 'अभी लीडिंग चैनल नहीं हैं अगर वो आएंगे तो हम पर दबाव बनाएंगे' मुकेश नायक जी शायद बैनर देख कर खबर की ताकत का अंदाजा लगाते हैं। उन्हें यह नहीं मालूम कि खबर में दम हो तो किसी भी चैनल,अखबार,यूट्यूब या फिर वेबसाइट में लगेगी तो उसकी मारक क्षमता ब्रह्मास्त्र के बराबर होगी। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष शायद यह भूल गए कि जब कोई प्रदर्शन अथवा आंदोलन होता है तो वही बगैर लीडिंग वाले चैनल उनके पीछे खड़े होते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता तो गिनती के ही होते हैं लेकिन मीडिया कर्मियों की भीड़ वहां पर पर्याप्त हो जाती है और उन्हीं के बूते कांग्रेस अपने प्रदर्शन को सफल बताती है। इतनी मेहनत करने के बाद भी अगर मीडिया कर्मियों को यह सुनने को मिले कि अभी लीडिंग चैनल नहीं आए हैं। और अगर किसी दिन कांग्रेस लीडिंग चैनलों का इंतजार ही करती रही तो पता चलेगा कि वहां पर अन्य कोई चैनल नहीं पहुंच पाएगा।
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