देर रात निगम-मंडलों की एक और सूची जारी कुछ चौंकाने वाले तो कुछ परिचित चेहरों को मिला मौका
मध्य प्रदेश में मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। शुक्रवार देर रात जब पूरा प्रदेश नींद की आगोश में था उसी वक्त राज्य सरकार ने एक बार फिर निगम-मंडलों की की सूची जारी कर पार्टी के कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया। इस सूची में करीब एक दर्जन से अधिक निगमों को शामिल किया गया है। सूची देख कर यह साफ नजर आ रहा है कि यहां पर संगठन की नहीं सरकार की जय कर चली। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने अपने हिसाब से नाम तय किए और उनकी घोषणा की है। जिस प्रकार सरकार और संगठन दोनों का संचालन सीएम खुद कर रहे हैं उससे उनकी ताकत और क्षमता का भी आंकलन किया जा सकता है। कहा जा रहा था कि हर जगह पेंच फंसा है। लेकिन हकीकत तो ये है कि कहीं भी पेंच फंसा ही नहीं है। सारे पेंच तो सीएम ने ढीले कर दिए हैं। और जिनके पेंच ढीले थे उनके पेंच को सीएम ने टाइट कर दिया है। निगम-मंडलों की लिस्ट देख कर यह अंदाजा भी लगाया जा सकता है कि सामान्य वर्ग को नमक की तरह इस्तेमाल किया गया है। बांटी अन्य वर्गों को जम कर महत्व दिया गया है। सूची जारी होने के बाद लोगों में खुशी कम आश्चर्य के भाव ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इस सूची में बाल आयोग के अध्यक्ष रहे राघवेन्द्र शर्मा को भी मौका दिया गया है जो कार्यालय मंत्री के तौर पर सफलता पूर्वक कार्य कर चुके हैं। अब वो योग आयोग के अध्यक्ष के तौर पर अपनी नई जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। करीब दर्जन भर नेताओं को निगम-मंडलो में शामिल किया गया लेकिन IDA और BDA को लेकर अब तक सरकार ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार IDA में सीएम यादव और कैलाश विजयवर्गीय के बीच समाधान नहीं निकल पा रहा है। सीएम अपने व्यक्ति को रखना चाहते हैं तो वहीं कैलाश विजयवर्गीय अपनी पसंद के नेता को उपक्रित करना चाहते हैं। ठीक उसी प्रकार भोपाल की स्थिति है। जहां पर दो मंत्री,दो विधायक और सीएम के बीच कश्मकश चल रही है। इसी लिए भोपाल विकास प्राधिकरण की घोषणा अब तक नहीं हो पाई है।
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