काटजू अस्पताल में खतरे में नौनिहालों की और लाड़ली बहनों की जिंदगी संक्रमित ग्लब्स को बार-बार यूज करने का जारी हुआ आदेश
मप्र का स्वास्थ विभाग तंगी की हालत से गुजर रहा है और इसकी गवाही Mukhbir नहीं बल्कि कैलाशनाथ काटजू चिकित्सालय से जारी एक पत्र खुद दे रहा है। पत्र में नोडल अधिकारी ने जिस प्रकार से आदेश दिया है उससे साफ है कि जिस अस्पताल में महिलाएं भर्ती होती हैं जहां पर बच्चों का जन्म होता है उस अस्पताल में अब डाक्टरों के द्वारा यूज किए गए ग्लब्स को फेंकने के बजाय नर्सों सहित अन्य स्टाफ को इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार सफलता के दो साल मना रही है और प्रदेश का स्वास्थ विभाग खुद बीमारी से जूझ रहा है जिसका इलाज राज्य सरकार नहीं कर पा रहा है। अस्पताल की तरफ से स्टाफ के लिए जारी आदेश ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की कली खोल कर रख दी है। ये वही अस्पताल है जिसकी बिल्डिंग में करोड़ों रुपये खर्च कर उसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। तात्या टोपे स्टेडियम के पास बने इस अस्पताल की बिल्डिंग बाहर से देखने में जितनी अमीर है अंदर से उतनी ही गरीब। क्योंकि ग्लब्स डिस्पोजेबल होते हैं। एक बार यूज करने के बाद उन ग्लब्स का इस्तेमाल करना यानि संक्रमण को जान बूझ कर न्योता देना है। और सबसे बड़ी बात यह है कि जहां पर सबसे ज्यादा इंफेक्शन फैलने का डर है यानि जहां पर प्रसूताएं बच्चों को देश के भविष्य को जन्म देती हैं वहां पर डाक्टरों के द्वारा इस्तेमाल किए ग्लब्स को दोबारा और बार-बार यूज करने का आधिकारिक आदेश जारी कर यह बता दिया गया है कि स्वास्थ विभाग को नौनिहालों और लाड़ली बहनों के स्वास्थ्य की कितनी चिंता है।
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