अब 'फ्रंट फुट' पर खेलेंगे बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल प्रदेश कार्यसमिति से शुरु होगा दौर
मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के नाते पार्टी काफी मजबूत दिखती है लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस प्रकार से पार्टी का नया स्ट्रक्चर तैयार हुआ है उससे यह साफ नजर आता है कि प्रदेश अध्यक्ष की सरलता और शालीनता का फायदा पार्टी के अन्य पदाधिकारियों ने जम कर उठाया है। उसी का नतीजा है कि आज पार्टी में कांग्रेसी कल्चर खूब देखने को मिल रहा है। दो उप चुनाव में पार्टी की हार और पार्टी में नेताओं की बढ़ती बदजुवानी एक बड़ी समस्या का विषय रहा है। पार्टी के कुछ तथाकथित पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर ऐसी परिस्थितियां निर्मित की जाती रही हैं जिसका असर प्रदेश अध्यक्ष के फैसलों पर देखने को मिलता रहा है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी अब तक सभी पदाधिकारियों को खूब मौका दिया। और उस मौके का असर ये देखने को मिला कि पार्टी के अंदर अंतरद्वंद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। इन सभी हालातों को बारीकी से समझने के बाद अब प्रदेश अध्यक्ष ऐक्शन अवतार में दिखाई पड़ने वाले हैं। मुखबिर को मिली जानकारी के अनुसार ओरछा में होने वाली भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति में बीजेपी अध्यक्ष कुछ बड़े और सकारात्मक फैसले लेने पर विचार कर रहे हैं। प्रदेश कार्यकारिणी के बाद पार्टी में कुछ और नियुक्तियां की जाएंगी। जिसमें कार्यालय प्रभारी भी शामिल है। अभी तक कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बरुआ संभाल रहे हैं लेकिन अब इस दायित्व से उन्हें मुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी संगठनात्मक तौर पर कुछ और बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है। जिसके तहत पार्टी का माहौल बेहतर बनाया जा सके और कार्यकर्ताओं में चुनाव जीतने की भूख बढ़ सके। साल 2027 में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव भी होने हैं लिहाजा निष्कृय पड़े कार्यकर्ताओं को एक बार फिर सक्रिय करने की बड़ी चुनौतियां हैं। अब तक बीजेपी अध्यक्ष ने सामान्य फैसले लिए सभी को जम कर मौका दिया लेकिन अब प्रदेश अध्यक्ष खुद आगे आकर नेतृत्व करने की प्लानिंग कर रहे हैं। इस बात में कोई सक नहीं कि बीजेपी अध्यक्ष एक कुशल संगठक हैं जिसका परिचय वो समय-समय पर देते रहे हैं। लेकिन उनके अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में कुछ ऐसे पदाधिकारी भी बने जो उनके करीबी होने के अलावा अपनी चलाने पर विश्वास रखते हैं। अब ऐसे नेताओं की मनमानी खत्म होने वाली है। बेपटरी हो चुकी पार्टी की व्यवस्था को फिर पटरी में लाया जाएगा। पहले दिन करीब सात सत्र आयोजित किए जाएंगे जिसमें बीजेपी अध्यक्ष अपना इरादा स्पष्ट कर देंगे कि वो पार्टी के पदाधिकारियों से क्या चाहते हैं।
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