'डॉक्टर' के राज में मौत के बढ़े आंकड़े 'घंटे' की गूंज के बीच सवर्णों पर लगातार की गई अभद्र टिप्पणी 'इलाज' करने में नाकाम रही सरकार
मध्य प्रदेश में मोहन मोहन सरकार अपने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकी है जिसकी उपलब्धियां सरकार ने दिसंबर के महीने में लगातार गिनाई। उपलब्धियां गिनाते हुए सरकार के मंत्रियों और सीएम ने सबकुछ बताया लेकिन ये नहीं बताया कि इन दो सालों में प्रदेश में सरकार की लापरवाही के चलते कितनी मौतें हुई और सवर्ण वर्ग के खिलाफ किस प्रकार से अभद्र टिप्पणियां की गई और सभी मामलों को राज्य सरकार सिर्फ ढकने का प्रयास करती रही। छिंदवाड़ा में जहरीला सिरप पीने से कई मासूम मौत के गाल में समा गए सरकार उस मौत के तांडव को ढकने का ही प्रयास कर रही थी कि मप्र की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी कांड हो गया जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और सरकार यहां पर एक दूसरे पर मौत का ढीकरा ही फोड़ती रही। पूरी सरकार इंदौर में 'घंटा' बजाती रही और उसकी गूंज देश में सुनाई पड़ती रही लेकिन घंटे की गूंज ने मौतों की सिसकारियों को भी दबा दिया। साल 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश को लंबे अंतराल के बाद भाजपा ने एक नया सीएम दिया। प्रदेश की जनता को लगा कि अब नया सीएम आया है तो कुछ नया देखने और सुनने को मिलेगा लेकिन इन दो साल में जिस प्रकार से घटनाएं देखने को मिली उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। भाजपा ने डॉक्टर मोहन यादव को सीएम बनाया जिनके नाम में जुड़ा है डॉक्टर जिसकी लोगों की रक्षा करना जिम्मेदारी होती है। लेकिन डॉक्टर के राज में न सिर्फ इंसानों की मौत हुई बल्कि यादव राज में गायों को लगातार काटने की खबर आती रही। यहां तक की राजधानी भोपाल में गायों का मांस बरामद हुआ फिर भी सरकार चुप रही। मोहन सरकार में ब्राह्मण वर्ग के खिलाफ लगातार बयान होते रहे लेकिन सरकार चुप रही। ऐसा लगता है कि जैसे प्रदेश में सरकार नाम की चीज ही नहीं है। सीएम मोहन यादव प्रदेश के विकास की बात करते हैं। लेकिन ऐसा विकास किस काम का जो इंसानों कब्र के ऊपर किया जाए।ऐसा विकास किस काम का जहां सवर्ण वर्ग की इज्जत को दांव पर लगाया जाता हो। मोहन सरकार छिंदवाड़ा मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई न ही इंदौर दूषित पानी मामले में कोई बड़ा फैसला कर पाई। और न ही स्लाटर हाउस मामले में सरकार कोई ऐतिहासिक फैसला कर पाई। ऊपर से जिस प्रकार से सवर्ण वर्ग पर लगातार शब्दों की गोली चलाई जा रही है उस पर भी प्रदेश की सरकार कुछ नहीं कर पाई। ऊपर से पूरे मामले को लीपा पोती कर सरकार खुद की छवि को चमकाने में लगी है। लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि जिस डॉक्टर के राज में इंसान और गायों का जीवन सुरक्षित नहीं,जिस डॉक्टर के राज में ब्राह्मण सहित सभी सवर्ण वर्ग को खुलेआम गालियां दी जा रही हैं उस डॉक्टर के राज को कैसे सही ठहराया जा सकता है। और ऊपर से हद तो तब हो गई जब मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस बात पर मुहर लगा दी कि कोई कलेक्टर एसपी बगैर पैसे लिए काम नहीं कर रहा जिस पर उन्होंने सीएम को कोट करते हुए कहा कि सारी बातें सीएम को भी मालूम हैं इसलिए वो कलेक्टरों से नाराज हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर के राज को कैसे व्यवस्थित राज कहा जा सकता है।
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