भाजपा की 'क्लस्टर रणनीति' से कांग्रेस के अभेद्य किलों को 'खंड-खंड' करने की रणनीति पर काम कर रहे बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल
मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपना चुनावी अनुभव पार्टी में अभी से लागू करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस बात में कोई सक नहीं कि बीजेपी अध्यक्ष को संगठनात्मक गतिविधियों का अच्छा ज्ञान है और उसकी बानगी वो साल 2024 के लोकसभा चुनाव में सभी 29 लोकसभा सीटें जिता कर दिखा चुके हैं। विधानसभा चुनाव के लिए अभी पर्याप्त समय है लेकिन बीजेपी अध्यक्ष ने चुनाव की तैयारियों को अमली जामा पहनाने का काम अभी से शुरु कर दिया है। बीजेपी अध्यक्ष अब उन सीटों पर काम कर रहे हैं जहां पर कांग्रेस लगातार चुनाव जीत रही है और वो सीटें भाजपा के लिए अभेद्य किला साबित हो रही हैं। ऐसी सीटों के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने विशेष रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के तहत तीन-चार गांवों का क्लस्टर बना कर उनकी जिम्मेदारी दिग्गज नेताओं को दी जाएगी। वरिष्ठ नेता ऐसी सीटों में हार और जीत का अध्ययन करेंगे और उन कमजोरियों को दूर करने के लिए मजबूत रणनीति बनाएंगे। ऐसी कई सीटों पर कांग्रेस जहां अपने दिग्गजों के कारण मजबूत है उनका किला भी भेदने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। ऐसी सीटों में खरगोन जिले की भगवानपुरा सीट है,धार जिले की कुक्षी सीट,भीकनगांव सीट,सीधी जिले की चुरहट सीट,भोपाल उत्तर सीट,छिंदवाड़ा जिले की चौरई सीट,बालाघाट की परसवाड़ा सीट सहित कुछ अन्य विधानसभा सीटें हैं जो भाजपा के लिए अभेद्य किला साबित होती रही हैं। भाजपा संगठन की तरफ से इन सीटों में सुराग बनाने की प्रत्येक कोशिशें हुईं लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी। अब भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मजबूत रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। और जिस प्रकार से उनका चुनावी ज्ञान और अनुभव है उससे यह कहा जा सकता है कि भाजपा यहां पर सार्थक परिणाम हासिल करने में सफल हो सकती है। वहीं कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज कर लगातार हारने वाली सीटों पर काम कर रही है और न सिर्फ कमजोरियों को दूर करने का प्रयास कर रही है बल्कि भाजपा के अभेद्य किलों को किस प्रकार से ढ़हाया जा सकता है उस पर भी कांग्रेस मजबूती के साथ काम कर रही है। लेकिन दोनों पार्टियों में धरती और आसमान का अंतर है। कांग्रेस की रणनीति प्रदेश कार्यालय के कक्ष में बनती है और प्रदेश कार्यालय के बाहर आते ही ध्वस्त हो जाती है। वहीं भाजपा की रणनीति बनती तो बंद कमरे में है लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा के नेता इतनी मजबूती से काम करते हैं कि कांग्रेस वहां पर चारो खानें चित्त हो जाती है।
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