दतिया हार के बाद सीएम और अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बढ़ी दूरियां संवादहीनता के चलते नाराज नेताओं की बढ़ी संख्या
मध्य प्रदेश भाजपा में बाहर से देखने में सबकुछ ठीक लग रहा है लेकिन अंदर से भाजपा उतनी ही खोखली होती जा रही है। दरअसल भाजपा में नेताओं के बीच आपसी संवाद हुआ करते थे और वही पार्टी की ताकत का अहसास कराते थे लेकिन सरकार और संगठन का नेतृत्व बदलने के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में संवाद हीनता बढ़ती जा रही है। संगठन की तरफ से वरिष्ठ नेताओं से संवाद नहीं हो रहा है जिसकी बानगी दतिया उप चुनाव में भी देखने को मिली और उसी का परिणाम था कि भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां पर पूर्व मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने टिकट नहीं देने को लेकर पूर्व में कोई संकेत नहीं दिया और न ही उन्हें पूरी तरह से भरोसे में लेकर कदम आगे बढ़ाया। जबकि पूर्व गृह मंत्री 2023 के चुनाव में हारने के बाद भी एक मजबूत दावेदार थे और इस बार उनके चुनाव जीतने की पूरी संभावना थी लेकिन भाजपा नेतृत्व ने यहां खुद की चलाई और संवाद हीनता का असर सीधे देखने को मिला नतीजा हार रहा। पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा को चुनाव प्रचार के लिए कहा ही नहीं गया जबकि वो एक मजबूत नेता माने जाते हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की दतिया शहर में सभा कराने के बजाय बसई में सभा कराई गई। यह सब संवादहीनता की पराकाष्ठा थी जिसे भाजपा नेतृत्व स्वीकार नहीं कर रहा है। संवादहीनता का आलम यहीं नहीं थमता अब तक सरकार से नाराज चल रहे चेहरों में कैलाश विजयवर्गीय सबसे आगे थे लेकिन इसमें संगठन के पुराने दिग्गज के तौर पर पूर्व मंत्री अजय विश्नोई का नाम भी जुड़ गया है। वो इंटरनेट मीडिया में अपनी पर अपनी ही सरकार के खिलाफ जम कर लिख रहे हैं। दरअसल मुखबिर को मिली जानकारी के अनुसार अब तक हुई संवादहीनता का कारण भी सीएम मोहन यादव थे। क्योंकि वो प्रदेश अध्यक्ष को खुल कर फैसले नहीं लेने देते थे। सीएम ने संगठन में अपने करीबी को प्रदेश महामंत्री भी बनवा रखा है जिसके कारण प्रदेश अध्यक्ष की एक-एक कार्ययोजना पर बारीकी से नजर रखी जाती है। इसकी जानकारी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी लग चुकी है। जिस दिन से प्रदेश अध्यक्ष को सभी मामलों की जानकारी लगी उसी दिन से उन्होंने सीएम से कुछ दूरियां भी बनानी शुरु कर दी हैं। खबर है कि अब बीजेपी अध्यक्ष खुद सीएम से नाराज नजर आ रहे हैं। दोनों के बीच कुछ दूरियां बढ़ी हैं। संवादहीनता के चलते ही पार्टी के की पदाधिकारी नाराज हैं कुछ नेताओं को काम नहीं मिल रहा कुछ नेताओं को महत्व नहीं मिल रहा। पार्टी के अंदर एक ऐसी दरार पनप रही है जिसे पाटना पार्टी के लिए मुश्किल होता जा रहा है। समय रहते भाजपा नहीं चेती तो भाजपा का सारा कैडर तहस- नहस हो जाएगा और भाजपा के नेता हाथ ही मिलते रहे जाएंगे।
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