भाजपा में तेजी से बढ़ता 'कांग्रेसी' कल्चर मूल कार्यकर्ताओं की निष्ठा पर खड़ा कर रहा प्रश्न जितनी बढ़ी भीड़ उतना बढ़ा असंतोष
कैडर की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी का कैडर कांग्रेस से आए कार्यकर्ताओं में खोता चला जा रहा है। दरअसल भाजपा में अनुशासन ही सर्वोपरि माना जाता है। लेकिन जिस दिन से भाजपा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए दरवाजा खोला उसी दिन से दूसरे दरवाजे से भाजपा का कैडर गायब हो गया। जिस भाजपा में पार्टी लाइन से हट कर बयान देने वाले नेताओं पर कार्रवाई हुआ करती थी उसी भाजपा में अब बंद कमरे में नेता को समझाइश तो दी जाती है और उसकी तस्वीरें भी वायरल की जाती हैं लेकिन बैठक से निकलते ही वही नेता फिर विवादित बयान देता है। दरअसल साल 2023 से 24 के बीच न सिर्फ मध्य प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन थामा बल्कि पूरे देश भर में करोड़ों की संख्या में अलग-अलग पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन थामा। सरकार बनाने के चक्कर में भाजपा ने सभी को ज्वाइन तो करवा लिया। लेकिन उनकी विचारधारा को पार्टी बदल नहीं पाई और उसका परिणाम यह निकला कि कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ताओं ने भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की विचारधारा को ही बदल कर रख दिया। पिछले कुछ महीनों से देखने में आ रहा है कि कांग्रेस से आए तथाकथित भाजपाई तो शांत हैं वहीं मूल भाजपाइयों की विचारधारा इतनी बदली कि अब वो विवादित बयान देने लगे। पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता खुद के भविष्य को लेकर चिंतित है। जो भी कार्यकर्ता मिलता है वो यही कहता है कि अब भाजपा की स्थिति कांग्रेस से भी खराब हो चुकी है। ऊपर से भाजपा का कोर वोटर जो सवर्ण है वो भी भाजपा से नाराज है। क्योंकि पार्टी में होती सवर्णों की उपेक्षा के कारण अब उनका मोह पार्टी से भंग होने लगा है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव है और ऐसी स्थिति में भाजपा से सवर्णों का नाराज होना पार्टी के लिए काफी घातक माना जा रहा है। लेकिन सवर्णों की नाराजगी अब तक भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दिखाई नहीं पड़ी जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि हर प्रकार की एजेंसियां भाजपा सरकार के पास होने के बाद भी भाजपा का सूचना तंत्र खराब है जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना होगा।
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