सवर्ण वर्ग के विद्यार्थी सियासी दलों के लिए बने 'अछूते' कोई भी राजनीतिक दल सामान्य वर्ग की नहीं करना चाहता बात

Aug 26, 2026 - 08:22
 0  6
सवर्ण वर्ग के विद्यार्थी सियासी दलों के लिए बने 'अछूते' कोई भी राजनीतिक दल सामान्य वर्ग की नहीं करना चाहता बात

सत्ता के शिखर तक पहुंचने की लालसा में राजनीतिक दलों के लिए सवर्ण वर्ग का विद्यार्थी अछूता बन चुका है। एससी,एसटी और ओबीसी वर्ग की हर राजनीतिक पार्टियां बात करना चाहती हैं लेकिन सवर्ण वर्ग के लिए कोई बात करने को तैयार नहीं है। स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा सवर्ण वर्ग में देखने के मिल रही है। पढ़ें लिखे युवा आज घर बैठे हैं क्योंकि उनके पास नौकरी नहीं है। सामान्य वर्ग का पढ़ा लिखा युवा आज सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा है और उनसे कम पढ़े लिखे और नंबर लाने वाले लोग शासकीय नौकरियां कर  सवर्णों को चिढ़ाने का काम कर रहे हैं। देश का कोई भी राजनीतिक दल हो सभी दलों में सवर्ण वर्ग के नेताओं की बड़ी संख्या है लेकिन सामान्य वर्ग का कोई भी नेता अपने समाज की बात करने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि वो जी हुजूरी करके अपना और अपने बच्चों का तो भविष्य संवार रहे हैं बांकी उनको अन्य सामान्य वर्ग से कोई लेना देना नही है। सामान्य वर्ग का युवा अधिकार की मांग कर रहा है। वो नौकरी की बात कर रहा है, योग्यता की बात कर रहा है लेकिन सरकार की आंख नहीं खुली रही है। साल 2013 के बाद सवर्णों की स्थिति देश में ज्यादा खराब हुई है। जब तक कांग्रेस केन्द्र और राज्यों में रही तब तक सवर्णों की उपेक्षा नहीं हुई लेकिन भाजपा की सरकार ने सत्ता में बने रहने के लिए जातियों का ऐसा बीज बोया जो आज बट वृक्ष बन चुका है और उसकी जड़ें इतनी फैल चुकी हैं कि सवर्णों को वो जड़ें आपस में समाहित किए ले रही हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि क्या सामान्य वर्ग में पैदा होना अपराध है अथवा पाप। हर इंसान को ईश्वर पैसा करता है और वही कुल गोत्र निर्धारित करता है इस व्यवस्था में इंसान की कोई भी भूमिका नहीं है उसके बाद भी सामान्य वर्ग के युवा सरकार की बेरुखी का सामना कर रहे हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow