भाजपा के संकट का 'मोचन' करने वाले नरोत्तम मिश्रा को घर बैठाने से बढ़ी समस्याएं नाराज जेन-जी और सवर्ण को कौन मनाएगा

Aug 25, 2026 - 08:49
 0  9
भाजपा के संकट का 'मोचन' करने वाले नरोत्तम मिश्रा को घर बैठाने से बढ़ी समस्याएं नाराज जेन-जी और सवर्ण को कौन मनाएगा

मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के प्रति बढ़ते असंतोष का आलम ये है कि अब भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता भी यही कहते नजर आते हैं कि भंवर में फंसी भाजपा की नैया को कौन पार  लगाएगा। दरअसल भाजपा की इन समस्याओं का दायरा दतिया उप चुनाव में हार के बाद बढ़ने लगा। पहली बार भाजपा के इतिहास में भाजपा को अपने ही कार्यकर्ताओं से विद्रोह झेलना पड़ा जहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से दतिया के भाजपा कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ विरोध प्रदर्शन किया था बल्कि करीब 23 हजार कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया था उसके बाद भाजपा को दतिया में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद भाजपा पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। जेन-जी ने प्रदर्शन कर भाजपा को बैकफुट पर ला खड़ा किया आज भाजपा को जेन-जी के हिसाब से अपनी रणनीति बनानी पड़ रही है। उसके बाद भोपाल में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की 100% खरीद को लेकर जोरदार प्रदर्शन और आंदोलन किया था। इस विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रालय से एक पत्र सामने आया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार तय नियमों और निर्धारित कोटे के तहत ही सीमित मात्रा में मूंग खरीद सकती है, जबकि बाकी खरीदी की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इस पत्र के आने के बाद विपक्षी दलों को राज्य सरकार को घेरने का मौका मिल गया और यह सवाल उठने लगे कि क्या केंद्र के इस स्पष्ट रुख से मोहन यादव सरकार किसानों के बीच घिर गई है। साथ ही, प्रदेश में शिवराज की सक्रियता और केंद्रीय नीति के तालमेल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इन सबके बीच भाजपा के कोर बोटर रहे सवर्ण वर्ग की नाराजगी भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या का सबब बन चुका है। प्रदेश के प्रत्येक जिले से सवर्ण वर्ग के नाराजगी की खबरें आ रही हैं। ऐसा भी नहीं कि इस तरह की परिस्थितियां भाजपा सरकार और संगठन के सामने पहली बार आई हैं। लेकिन उस वक्ता भाजपा के पास डाक्टर नरोत्तम मिश्रा जैसा संकटमोचक हुआ करते थे। सरकार हो अथवा संगठन जहां भी समस्या हुआ करती थी वहां पर पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा अभेद्य दीवार बन कर खड़े रहते थे। लेकिन भाजपा ने अपनी उस अभेद्य दीवार पर खुद ही बुलडोजर चला दिया लिहाजा अब भाजपा के पास ऐसा एक भी नेता नहीं है जो पूरी ताकत और तत्थ्यों के साथ सरकार और संगठन की बात रख सके। ऐसी स्थिति में भाजपा के जनाधार को बचाए रखना वर्तमान नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow