चर्चाओं में बने रहने के लिए 'सियासत' के समुंदर में पत्थर मारने का काम करते हैं बीजेपी के कुछ नेता
मध्य प्रदेश शांति का टापू कहा जाता है लेकिन पिछले कुछ महीनों से इस टापू में बीजेपी के नेता पत्थर मारने का काम कर रहे हैं। दरअसल साल 2023 में सीएम बदलने के बाद कुछ नेताओं को पोर्टपोलियो के नाम पर मंत्री तो बनाया गया है लेकिन उनके हाथ में करने का कोई अधिकार नहीं है। यही कारण हैं कि जो एमपी शांति का टापू कहा जाता था उसी टापू में नेताओं के बयानों के नुकीले तीर चलना आम बात हो गई है। दरअसल वरिष्ठ नेताओं के साथ में कोई अधिकार है नहीं लिहाजा पावर कट होने के कारण नेता खुद से आपा खो रहे हैं। कई प्रमुख नेताओं के बड़बोलेपन ने पार्टी और संगठन दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कभी इतिहास की घटनाओं की गलत व्याख्या तो कभी मंच से अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल, ये नेता अक्सर अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर देते हैं। जनता के बीच चर्चा में रहने की होड़ हो या फिर बयानों के जरिए सुर्खियां बटोरने का अंदाज, इन नेताओं के अटपटे बोल अक्सर राजनीतिक तापमान को तेजी से बढ़ा देते हैं। अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले नेताओं में गुना से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने ऐतिहासिक पात्रों और महिलाओं को लेकर ऐसा विवादित बयान दिया कि मंच पर मौजूद महिला विधायक को भी आपत्ति जतानी पड़ी। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी भी अपने बयानों के चलते लगातार चर्चा में बने रहते हैं, जिन्होंने विपक्ष पर फंसाने के लिए महिलाओं को भेजने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस तरह के बयानों से पार्टी को सार्वजनिक मंचों पर लगातार सफाई देनी पड़ जाती है। मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कुंवर विजय शाह भी अपने बयानों के कारण कई बार कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में घिर चुके हैं। इसके अलावा, बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने बेबाक और अनूठे अंदाज के लिए जाने जाते हैं, जिनके कई भाषण राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का कारण बनते हैं। कैलाश विजयवर्गीय को अमित शाह का खास माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ, रीवा से सांसद जनार्दन मिश्रा भी अपने बड़बोलेपन और अजीबोगरीब बयानों के चलते अक्सर सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं।
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