एमपी के मॉडल को असम में अपनाएगी भाजपा 'बूथ जीता- चुनाव जीता' मॉडल को लागू करने तीन सांसद और कई मंत्री डालेंगे डेरा
शुक्रवार को भोपाल के रविन्द्र भवन में हुए प्रशिक्षण के बाद एमपी बीजेपी के कार्यकर्ताओं की पहली परीक्षा असम विधानसभा चुनाव में होने जा रही है। गौरतलब है कि असम में अप्रैल महीने में विधानसभा चुनाव होना है। उस चुनाव को जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश भाजपा के कई नेताओं को असम भेजने की योजना बनाई है। पार्टी ने तीन सांसदों आलोक शर्मा, विवेक साहू और दर्शन सिंह चौधरी, मंत्री राकेश सिंह, पूर्व सांसद केपीएस यादव को अलग-अलग दायित्व दिया है। इस प्रक्रिया में वरिष्ठ नेता विनोद गोटिया को मध्य प्रदेश की ओर से प्रभारी बनाया गया है। ये सभी नेता 10 मार्च के बाद असम पहुंच जाएंगे। मध्य प्रदेश के नेता विशेष रूप से बूथ स्तर पर रणनीति और प्रबंधन का कार्य संभालेंगे। राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार को भी कछार जिले की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य हर बूथ पर 50 प्रतिशत से अधिक मतदान सुनिश्चित करना है।असम में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी मध्य प्रदेश के कुछ संगठनात्मक क्षमता वाले नेताओं के अनुभव का पूरा लाभ उठाना चाहती है। ये सभी नेता 10 मार्च 2026 के बाद असम में अपने-अपने क्षेत्रों में मोर्चा संभालेंगे। पार्टी का मुख्य लक्ष्य हर बूथ पर 50 प्रतिशत से अधिक मतदान सुनिश्चित करना है। दरअसल, भाजपा का मध्य प्रदेश का संगठन अपनी 'कैडर-बेस' मजबूती और बूथ प्रबंधन के लिए देशभर में जाना जाता है। असम में मध्य प्रदेश के नेताओं को भेजने के पीछे पार्टी की रणनीति काफी स्पष्ट है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव भाजपा ने मध्य प्रदेश में जिस मॉडल पर जीता था, उस 'बूथ जीता, चुनाव जीता' के मंत्र को यहां के नेता असम में लागू करेंगे। विनोद गोटिया, राकेश सिंह और आलोक जैसे नेताओं के पास संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने का लंबा अनुभव है। असम में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा इस बार 100 सीट से ऊपर जीतने की तैयारी में है। असम के नतीजे आने के बाद भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनाव में जाने वाले नेताओं की लिस्ट भी तैयार करेगी।
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