पटवारी के 'संगठन सृजन' पर बीजेपी की दो अंगुलियां भारी साल भर की मेहनत एक दिन में हुई ध्वस्त
मध्य प्रदेश कांग्रेस से साल 2025 में संगठन सृजन अभियान चलाया गया और संगठन को ने सिरे से खड़ा किया गया। लग रहा था कि नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस कुछ हद तक भाजपा का सामना करेगी लेकिन राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस के संगठन सृजन पर महज दो दिन में पानी फेरते हुए आइना दिखाने का काम किया है। जिन नेताओं के बल पर पटवारी डींगे हाक रहे थे वो सारे नेता पार्टी के विभीषण निकले। जिस प्रकार से चुनाव लड़े बगैर कांग्रेस राज्यसभा का चुनाव हार गई उससे पार्टी के अंदर चलने वाली गुटबाजी और आंतरिक कलह वो सब बाहर आ गई। वहीं दूसरी तरफ जीत के घोड़े पर सवार भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को ऐसी पटखनी दी है जिसका दर्द लंबे समय तक इस हार का अहसास दिलाता रहेगा। तीनों राज्यसभा सांसदों को जीत का प्रमाण पत्र मिलने के बाद शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय में जश्न मनाया गया जिसमें सीएम मोहन यादव सहित अजय जामवाल,अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह के साथ सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। आतिशबाजी के साथ भाजपा नेताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाई और सभी नेताओं ने विक्ट्री का शाइन दिखाते हुए अपनी जीत को ऐतिहासिक बताया। साथ में यह भी साबित कर दिया कि कांग्रेस अब भी वहीं है जहां साल 2023 में चुनाव में हार के बाद थी। पार्टी का नेतृत्व भले बदल गया हो लेकिन नेता वही हैं और उनकी सोच कार्यशैली सबकुछ वही है। लिहाजा जब तक कांग्रेस में ये सभी नेता हैं तो भाजपा को जीत से कोई नहीं रोक पाएगा। मजे की बात यह है कि बार-बार हार के बाद भी कांग्रेस में कुछ नहीं बदला। न नेता बदले न नीति बदली और न ही नीयति बदली। सबकुछ जैसा का तैसा है। कांग्रेस नेताओं की सोच में कोई बदलाव नहीं आया। सभी नेता सीएम बनना चाहते हैं। सभी नेता अध्यक्ष बनना चाहते हैं। सभी नेताओं को पार्टी का सर्वोच्च पद चाहिए इसी लिए कांग्रेस आगे बढ़ने के बजाय लगातार पीछे हो रही है और भाजपा को वाक ओवर मिलता जा रहा है।
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