'ब्राह्मणों' पर हो रही अशोभनीय टिप्पड़ियों पर कार्रवाई न कर मोहन सरकार दे रही मौन 'स्वीकृति'

Jan 21, 2026 - 09:43
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'ब्राह्मणों' पर हो रही अशोभनीय टिप्पड़ियों पर कार्रवाई न कर मोहन सरकार दे रही मौन 'स्वीकृति'

मप्र का सामाजिक माहौल खराब करने में प्रदेश सरकार का भी अप्रत्यक्ष तरीके से बड़ा हाथ है। वर्तमान में भाजपा की सरकार है और किसी भी समाज की भावनाओं को ठेस न पहुंचे वो काम राज्य सरकार का है। और इस वक्त तो डबल इंजन की सरकार है उसके बाद भी देश के अलग-अलग राज्यों में जाति संघर्ष जैसी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं और भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार मूकबधिर बन कर सारा खेल अपनी खुली आंखों से देख कर धृतराष्ट्र बनी हुई है। भाजपा में सिर्फ वोट की राजनीति को महत्व दिया जाता है न कि जनभावनाओं को। जिस पार्टी का बीज ही ब्राह्मणों ने बोया था उसी पार्टी की सरकार देश और राज्य में है उसके बाद भी ब्राह्मणों पर लगातार अशोभनीय टिप्पणियां की जा रही है और पूरे मामले को देखने सुनने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार कोई एक्शन नहीं ले पाई है। मामला कर्नल सोफिया कुरैशी पर अभद्र टिप्पड़ी से शुरु हुआ और अब ब्राह्मणों को लगातार टारगेट किया जा रहा है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार सोशल इंजीनियरिंग में ही लगी है। इतिहास इस बात का गवाह है कि पांडवों की संख्या भले पांच थी और कौरवों की संख्या 100 लेकिन जीत पांडवों की ही हुई थी। साल 2018 में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने माई के लाल जैसा बयान दिया था। उन्हें लगा था कि उनका यह बयान मास्टर स्ट्रोक साबित होगा। लेकिन यह नहीं मालूम था कि दिखने में संख्या भले कम हो लेकिन ब्राह्मण वर्ग अलग होगा तो उनकी सरकार खतरे में आ जाएगी। आखिर ऐसा हुआ भी और भाजपा 15 साल बाद 107 सीटों में सिमट कर रह गई और प्रदेश में कांग्रेस ने वापसी कर ली। ये बात और है कि सिंधिया को मिला कर भाजपा ने सरकार में वापसी कर ली लेकिन उस एक बयान से भाजपा को कितना नुकसान हुआ यह भाजपा के नेता जानते हैं। और अब जिस प्रकार से मध्य प्रदेश में अलग-अलग वर्गों के नेता हों अथवा अधिकारी आए दिन ब्राह्मणों पर अशोभनीय टिप्पणी करते जा रहे हैं और वहीं सारे बयान सुन कर भी प्रदेश की मोहन सरकार मूकबधिर बनी हुई है। मतलब साफ है कि सरकार के नुमाइंदों के दिल में जो छिपा है वो दूसरों के बहाने बाहर आ रहा है इसलिए जो हो रहा है वो होने दो जैसी स्थिति में प्रदेश की सरकार चल रही है। सरकार को इस बात का भी अहसास है कि जनता बिकाऊ है। 2023 में लाड़ली बहना ने सरकार बना दिया तो 2028 में लाड़ला भाई लेकर आ जाएंगे और फिर सरकार बना लेंगे। यही मंशा लेकर डबल इंजन की सरकार चल रही है। अगर समय रहते असभ्य टिप्पणियों के खिलाफ सरकार की तरफ से कार्रवाई की गई होती तो शायद आज प्रदेश में जाति संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो रही होती। सारे मामलों में अप्रत्यक्ष तरीके से सरकार मिली हुई है। क्योंकि जिसके हाथ में हथियार है वो ग़लत देख कर भी अगर उसके खिलाफ ऐक्शन नहीं ले रहा है तो मतलब साफ होता है कि उसमें उसकी मौन स्वीकृति है।

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