गरीबों के लिए चुनाव लड़ना होगा मंहगा 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' बढ़ाने की तैयारी कर रही मोहन सरकार प्रस्ताव तैयार
मध्य प्रदेश सरकार आम आदमी और गरीब से चुनाव लड़ने के अधिकार को अप्रत्यक्ष तरीके से छीनने की तैयारी कर रही है। दरअसल साल 2027 में नगर निगम,नगर पंचायतों सहित इकाइयों के संभावित चुनाव से पहले प्रदेश की मोहन सरकार प्रत्याशियों द्वारा जमा की जाने वाली जमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) बढ़ाने पर विचार कर रही है। Mukhbir को मिली सूचना के मुताबिक, नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद स्तर पर अलग-अलग पदों के लिए डिपॉजिट राशि बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। नगर निगम महापौर के लिए जमानत राशि 20 हजार रुपए से बढ़ाकर 32 हजार रुपए, नगर पालिका अध्यक्ष के लिए 15 हजार रुपए से बढ़ाकर 24 हजार रुपए करने का प्रस्ताव है। चुनाव में कुल वैध मतों के 6 प्रतिशत से कम मिलने पर प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त होने का नियम है। इससे अधिक वोट मिलने पर राशि वापस कर दी जाती है। सत्ता में काबिज मोहन सरकार का मानना है कि जमानत राशि बढ़ाने से केवल गंभीर उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में उतरेंगे, जिससे चुनाव प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बन सकेगी। वर्तमान नियमों में संशोधन कर इस प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है, जिससे जून 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में इसे लागू किया जा सके। सरकार अगर ऐसा संशोधन करती है तो आम इंसान जो चुनाव लड़ने का सपना देखता है वो अपना नामांकन नहीं भरेगा ऐसी स्थिति में भाजपा और कांग्रेस जैसे दलों के ही लोग नामांकन भर पाएंगे। क्योंकि उनके पास पैसों की कमी नहीं है लिहाजा सरकार अप्रत्यक्ष तरीके से आम और गरीब के चुनाव लड़ने पर रोक लगा कर भाजपा को मजबूत बनाने की तैयारी कर रही है।
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