दतिया में 'आशु' के खिलाफ 'अ' संतोष भाजपा नेतृत्व दिन भर करता रहा डैमेज कंट्रोल लेकिन नहीं गल रही दाल
भाजपा एक अनुशासित और कैडर बेस पार्टी मानी जाती है लेकिन पिछले कुछ समय से भाजपा में ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो कार्यकर्ताओं के ही गले नहीं उतर रहे। जिस दतिया विधानसभा सीट से पूर्व गृह मंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा ने तीन बार जीत का परचम लहराया उसी दतिया के उप चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने ऐन मौके पर पूर्व गृह मंत्री का टिकट काट दिया। भाजपा के इस फैसले से दतिया विधानसभा के कार्यकर्ताओं ने खुद से आपा खो दिया और एक साथ करीब 23 हजार कार्यकर्ताओं ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। भाजपा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी एक नेता के समर्थन में बूथ कमेटियों से लेकर जिले तक की टीम ने इस्तीफा दे दिया हो। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पूर्व गृह मंत्री तो भोपाल आ गए लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं का ग़ुस्सा शांत नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में डैमेज कंट्रोल के लिए प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह,प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी,डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा सहित कई नेता दतिया पहुंच गए। रविवार को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दतिया दौरे पर पहुंचे जहां दिन भर कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए मान मनौव्वल का दौर चलता रहा। इधर पूर्व गृह मंत्री को दिल्ली नेतृत्व की तरफ से भी लगातार मनाने की कोशिश की गई। अब आज भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी का नामांकन भरा जाना है। ऐसी स्थिति में भाजपा की सांसें फूल रही हैं। दरअसल दतिया से उम्मीदवार बदले जाने के बाद अब यह सीट प्रतिष्ठा का केन्द्र बन चुकी है। इस हार जीत से पार्टी अथवा सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। फर्क पड़ेगा तो सिर्फ सीएम और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को क्योंकि विजयपुर के उप चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ चुका है और अब दतिया में भी भाजपा उप चुनाव हारती है तो सीएम यादव और हेमंत खंडेलवाल की रणनीति और प्रत्याशी चयन पर सवाल खड़े होंगे। इसी लिए अब दतिया की विजय दो नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है।
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