संगठन ही नहीं जन सेवा में भी हेमंत खंडेलवाल का नहीं कोई मुकाबला दो परिवार की परवरिश का उठा रहे जिम्मा
सियासी शोर शराबे के बीच आमतौर पर कुछ नेताओं का मानवीय संवेदना वाला चेहरा खो जाता है लेकिन इसके बाद भी बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपने अंदर के सामाजिक कार्यकर्ता और परिवार का मुखिया होने की जिम्मेदारी को बराबर महत्व देने का प्रयास किया है। यह खबर उसी मानवीय संवेदना पर आधारित है जहां दो महिलाओं ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की संवेदना को जाहिर कर यह बताया है कि बीजेपी अध्यक्ष सिर्फ राजनीति ही नहीं करते बल्कि जरुरत मंद इंसान की मुसीबत में वो ढाल बन कर एक मुखिया की जिम्मेदारी का निर्वहन भी सरलता के साथ करते हैं। तस्वीर में दिख रही दो महिलाओं में एक का नाम ममता नानकर और दूसरी महिला का नाम बबिता देशमुख है। दोनों मालाओं के पति की मौत हो चुकी है। इनके घर चलाने के अलावा बच्चों की पढ़ाई में दिक्कत हो रही थी। मामले की जानकारी बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को लगी तो उनके अंदर का सामाजिक कार्यकर्ता वाला भाव ऐसे जागा कि उन्होंने इन दोनों महिलाओं के न सिर्फ बच्चों के पढ़ाई का खर्चा उठाया बल्का घर का खर्चा उठाना का भी फैसला किया। बीजेपी अध्यक्ष ने दोनों महिलाओं के बच्चों के सिर पर अपना हाथ रखा और कहा कि बच्चे सिर्फ पढ़ाई ही नहीं करेंगे बल्कि एक बेहतर जीवन भी जिएंगे। उनका जो भी खर्चा होगा वो खुद वहन करेंगे। खास बात यह है कि बीजेपी अध्यक्ष ने इस बात की कोई मार्केटिंग नहीं की और न ही इस बात का किसी से जिक्र किया लेकिन इस बात का उस वक्त खुलासा हुआ जब दोनों महिलाओं ममता और बबिता ने आगे आकर खुलासा किया कि उनके बच्चे अनाथ हो चुके थे लेकिन बीजेपी अध्यक्ष ने उन बच्चों के सिर पर अपना हाथ रख कर उनके जीवन को सरल बनाने का प्रयास किया है। और आज अब उनके बच्चे बीजेपी अध्यक्ष की मदद से स्कूल भी जा रहे हैं और महिलाओं का घर भी चल रहा है। यही खूबी बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को अन्य नेताओं से अलग बनाती है। और अन्य लोगों को एक सीख भी देती है कि अगर ईश्वर ने आपको किसी मदद के लायक बनाया है तो आपको आगे आकर अपनी क्षमता के हिसाब से लोगों की मदद भी करनी चाहिए।
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