भोपाल में 'मुर्दों' ने कराई 14 आरोपियों की 48 घंटे के अंदर जमानत
भोपाल की अमन कॉलोनी में ईरानी डेरे पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों की जमानत सवालों के घेरे में आ गई है। यहां हैरान करने वाली बात यह है कि जमानत के लिए पेश किए गए दो जमानतदारों की मौत पहले ही हो चुकी थी, फिर भी उनकी जगह दूसरे लोगों को खड़ा कर जमानत हासिल कर ली गई। इस घटना ने पुलिस की जांच कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई 27 और 28 दिसंबर की रात को हुई थी। इस मामले में पुलिस को सूचना मिली थी कि देश भर में वांछित बदमाश ईरानी डेरे में छिपे हैं। मामले में जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने वहां दबिश दी। इस दौरान वहां के रहवासियों द्वारा पुलिस पर पथराव भी किया गया था। पुलिस ने मौके से 22 पुरुष और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, ये लोग चोरी, लूट और ठगी जैसी वारदातों में शामिल थे। इन सभी पर बलवा, सरकारी काम में बाधा, मारपीट, तोड़फोड़ और संगठित अपराध जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। 5 जनवरी को 10 आरोपियों ने जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दी। जमानतदार के तौर पर जमील रहमान खान का नाम पेश किया गया और उसके नाम के जमीन के कागज भी दिखाए गए। जांच में पता चला कि जमील रहमान खान की तो दो साल पहले ही मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद, उसी नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को कोर्ट में पेश कर जमानत ले ली गई। अगले दिन, 6 जनवरी को चार और आरोपियों को भी ऐसे ही फर्जी जमानतदार के जरिए रिहा कर दिया गया। इस तरह कुल 14 आरोपी जेल से बाहर आ गए। गौरतलब है कि ईरानी डेरे में पुलिस से हुई झूमाझटकी और पत्थरबाजी की घटना में हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस पर हमला हुआ था। पहले स्थानीय महिलाओं ने पुलिस को रोका, फिर पुरुषों के साथ मिलकर पुलिस जवानों से हाथापाई की। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा था। बलवा करने के आरोप में 24 पुरुष और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था।
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