इंदौर मामले में सरकार के साथ 'मैनेज्ड' कांग्रेस पार्टी के अंदर चल रही लड़ाई को खुद सड़क पर उतार रही
मप्र कांग्रेस ने साल 2025 को संगठन सृजन वर्ष के रूप में मनाया और उसका नतीजा साल 2026 में ये निकला कि पार्टी दो धड़ों में बंट गई। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और अध्यक्ष पटवारी के बीत वर्चस्व की लड़ाई शुरु हो चुकी है। दिग्विजय सिंह सीहोर जिले में मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और एक्ट में बदलाव के विरोध में यात्रा निकाल रहे हैं तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रायसेन जिले से 'बूथ चलो' यात्रा निकाल कर जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने जिस प्रकार से यात्रा का आयोजन किया है उससे ऐसा लग रहा है कि पार्टी के अंदर चल रही आंतरिक कलह को दोनों ने अब सार्वजनिक मंच पर लाने की तैयारी कर ली है। क्योंकि एक साथ अलग-अलग मुद्दों को लेकर दोनों नेता अलग-अलग जिलों से यात्रा निकाल रहे हैं तो पार्टी की मंशा कुछ भी हो लेकिन जनता के बीच यहीं संदेश जा रहा है कि अब तक पर्दे के पीछे चल रही लड़ाई को पर्दे के बाहर लाया जा रहा है। मजे की बात यह है कि देश भर में इंदौर के दूषित पानी का मुद्दा गर्माया हुआ है और कांग्रेस के नेता मनरेगा और बूथ चलो की बात करके खुद को मुद्दे से अलग कर एक दूसरा रास्ता पकड़ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस एक अलग ही ट्रैक पर चल रही है। हालांकि ये वही जीतू पटवारी हैं जो प्रेस वार्ता के दौरान भी मुद्दों से भटक जाते हैं। जब भी असली मुद्दे की बात आती है तो उसको छोड़ जीतू पटवारी दूसरे मुद्दे की ही बात करते हैं। कुछ ऐसा ही इस वक्त कांग्रेस में देखने को मिल रहा है। जब कांग्रेस नेताओं को इंदौर सहित प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मिल रहे गंदे पानी पर बात करनी चाहिए उस वक्त कांग्रेस के नेता कुछ अलग ही मुद्दा लेकर मैदान में उतर रहे हैं इससे यह भी समझ में आ रहा है कि इंदौर के दूषित पानी मामले में कांग्रेस सरकार के साथ मैनेज हो गई है। कांग्रेस अक्सर मीडिया पर आरोप लगाती है कि मीडिया सत्य को जनता के सामने नहीं लाती यहां दूषित पानी मामले पर मीडिया विपक्ष की भूमिका निभा रही है और विपक्ष खुद अलग मुद्दे पर चल कर यह बताने की कोशिश कर रहा है कि उसे सामाजिक समस्या से कोई सरोकार नहीं है बल्कि वो तो अपनी अलग ही खिचड़ी पकाने की कोशिश कर रहे हैं।
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