गले तक भ्रष्टाचार में डूबे एमपी के 25 फीसदी राजपत्रित अधिकारी लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
मध्य प्रदेश में राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू संगठन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार 1982 से मई 2026 तक प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े 949 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें से 25% यानी 98 अधिकारी राजपत्रित श्रेणी के हैं।
रिपोर्ट के अहम आंकड़े
1. कुल प्रकरण: 1982 से मई 2026 तक लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में 949 मामले दर्ज
2. राजपत्रित अधिकारी: इनमें 98 अधिकारी राजपत्रित श्रेणी के हैं - यानी कुल का 25%
3. सबसे ज्यादा मामले: वर्ष 2013-14 में 397 मामले दर्ज हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है
4. जब्त की गई संपत्ति: इन 20 वर्षों में 962 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई
साल-दर-साल का हाल
लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू के आंकड़ों के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले:
- 2013-14: 397 मामले
- 2014-15: 359 मामले
- 2015-16: 428 मामले
- 2017-18: 278 मामले
- 2019-20: 265 मामले
जब्त संपत्ति के मामले में 2011-12 में 106 करोड़ और 2022-23 में 18.59 करोड़ रुपये की संपत्ति पकड़ी गई।
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में कुल 6,07,158 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी हैं। इनमें राजपत्रित अधिकारियों की संख्या 50 हजार के आसपास है। यानी कुल अधिकारियों का एक छोटा हिस्सा होते हुए भी राजपत्रित अधिकारियों की भ्रष्टाचार में हिस्सेदारी 25% है।
लोकायुक्त संगठन का कहना है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए 3 स्तर पर कार्रवाई की जा रही है - जिला पुलिस बल, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू। इन संस्थाओं के गठन के बाद ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगना शुरू हुई है।
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